लेफ्टिनेंट बनकर गांव पहुंचा बादल, मां बोली बेटे पर गर्व, ग्रामीणों ने निकाला जूलूस

 लेफ्टिनेंट बनकर लौटे बादल का ऐतिहासिक स्वागत, थार बैठाकर निकाला जूलूस 

गृह नगर लौटने पर भव्य, ऐतिहासिक और यादगार स्वागत किया गया। up to date


रेवाड़ी/महेंद्रगढ़। रेवाड़ी के यादव नगर निवासी एवं पैतृक गांव कुंभावास से ताल्लुक रखने वाले बादल यादव के भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनने के बाद पहली बार अपने गृह नगर लौटने पर उनका भव्य, ऐतिहासिक और यादगार स्वागत किया गया। यह स्वागत न केवल एक होनहार बेटे की सफलता का उत्सव था, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व और प्रेरणा का क्षण भी बन गया। बादल यादव की इस उपलब्धि से यादव नगर, कुंभावास गांव और आसपास के इलाकों में खुशी की लहर दौड़ गई। हर कोई इस युवा अधिकारी की सफलता को अपनी उपलब्धि मानते हुए उत्साह से भरा नजर आया। बूढ़पुर रोड स्थित कंकर वाली बगीची के शिव मंदिर से बादल यादव के स्वागत का शुभारंभ किया गया। यहां विधिवत पूजा-अर्चना के बाद उन्हें थार गाड़ी में सवार कराया गया। इसके पश्चात डीजे की देशभक्ति धुनों के बीच एक भव्य जुलूस के रूप में उन्हें उनके निवास स्थान यादव नगर तक ले जाया गया। जुलूस के दौरान लोगों ने फूल बरसाए, नारे लगाए और ढोल-नगाड़ों की थाप पर नाचते-झूमते नजर आए। पूरे मार्ग पर तिरंगे झंडे और बैनर लगे हुए थे, जो देशभक्ति के जज्बे को और अधिक मजबूत कर रहे थे।


 पैतृक गांव कुंभावास के लोगों में भी जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। up to date


इस अवसर पर यादव नगर के साथ-साथ पैतृक गांव कुंभावास के लोगों में भी जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। गांव से बड़ी संख्या में लोग रेवाड़ी पहुंचे और अपने बेटे के स्वागत में शामिल हुए। बुजुर्गों से लेकर युवा और बच्चे तक, सभी की आंखों में गर्व और चेहरे पर मुस्कान साफ दिखाई दे रही थी। लोगों का कहना था कि बादल यादव की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि मेहनत, अनुशासन और सही मार्गदर्शन से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।

बादल यादव की माता संतोष यादव इस मौके पर भावुक नजर आईं। उन्होंने कहा कि आज उन्हें अपने बेटे पर गर्व है। एक मां के लिए इससे बड़ा सुख कुछ नहीं हो सकता कि उसका बेटा देश की सेवा के लिए सेना में अधिकारी बना है। उन्होंने क्षेत्र के युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि शिक्षा को जीवन का सबसे बड़ा हथियार बनाएं और नशे जैसी बुराइयों से दूर रहें। उन्होंने कहा कि सही दिशा में मेहनत करने से सफलता जरूर मिलती है। बादल यादव के पिता अशोक यादव, जो स्वयं भारतीय सेना से सेवानिवृत्त कैप्टन हैं, ने इसे परिवार के लिए अत्यंत गौरव का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि उनका परिवार तीन पीढ़ियों से सेना से जुड़ा रहा है और यह परंपरा आगे भी जारी रहे, यही उनकी कामना है। उन्होंने बताया कि बादल यादव के दादा स्वर्गीय मातादीन वर्ष 1970 में सूबेदार के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। इसके अलावा ताऊ मदन लाल भी सेना में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। वहीं बादल यादव के नाना धनसिंह वर्ष 1993 में ओनरी कैप्टन के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। इस प्रकार बादल यादव की उपलब्धि सेना से जुड़े इस गौरवशाली परिवार की परंपरा को आगे बढ़ाने वाली है।


यह सम्मान उनकी मेहनत, लगन और नेतृत्व क्षमता का प्रमाण है। up to date


शिक्षा और प्रशिक्षण के क्षेत्र में भी बादल यादव का सफर प्रेरणादायक रहा है। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा सैनिक स्कूल रेवाड़ी से प्राप्त की, जहां से उन्हें अनुशासन, नेतृत्व और देशभक्ति की मजबूत नींव मिली। इसके बाद उन्होंने पहले ही प्रयास में राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) की परीक्षा उत्तीर्ण कर अपने परिवार और क्षेत्र का नाम रोशन किया। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया, जिसके लिए उन्हें थल सेना अध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी से कमांडेंट रजत पदक प्राप्त हुआ। यह सम्मान उनकी मेहनत, लगन और नेतृत्व क्षमता का प्रमाण है।


defance अब लेफ्टिनेंट बादल यादव भारतीय सेना की प्रतिष्ठित इंजीनियर रेजीमेंट में अपनी सेवाएं देंगे। इस रेजीमेंट की जिम्मेदारी देश की सुरक्षा के साथ-साथ कठिन परिस्थितियों में तकनीकी सहायता प्रदान करने की होती है। क्षेत्र के लोगों का मानना है कि बादल यादव इस जिम्मेदारी को भी पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ निभाएंगे। कुंभावास गांव में भी बादल यादव की इस उपलब्धि को लेकर गर्व और उत्साह का माहौल बना रहा। गांववासियों ने कहा कि बादल यादव की सफलता गांव के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने यह संदेश दिया है कि छोटे गांवों से निकलकर भी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई जा सकती है। गांव के लोगों ने इसे कुंभावास के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि इससे गांव का नाम पूरे देश में रोशन हुआ है।


लेफ्टिनेंट बनकर रेवाड़ी लौटे बादल यादव का यह स्वागत न केवल एक व्यक्ति की सफलता का उत्सव था, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा का संदेश भी थाl up to date


इस भव्य स्वागत समारोह के दौरान बड़ी संख्या में गणमान्य लोग, सामाजिक कार्यकर्ता और ग्रामीण उपस्थित रहे। इनमें नरेंद्र यादव, वेद प्रकाश, सुभाष यादव, हिमांशु यादव, मलखान सिंह, सुनील यादव, आयुष यादव, रोहतास नंबरदार, रायसिंह गोकलगढ़, हेमंत कुमार सहित सैकड़ों लोग शामिल रहे। सभी ने बादल यादव को शुभकामनाएं दीं और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। समारोह के अंत में बादल यादव ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें जो प्यार और सम्मान मिला है, वह उनके लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि वे हमेशा देश की सेवा को सर्वोपरि रखेंगे और अपने क्षेत्र का नाम रोशन करने का प्रयास करते रहेंगे। उन्होंने युवाओं से भी आह्वान किया कि वे सेना सहित अन्य सेवाओं में जाकर देश निर्माण में योगदान दें। कुल मिलाकर, लेफ्टिनेंट बनकर रेवाड़ी लौटे बादल यादव का यह स्वागत न केवल एक व्यक्ति की सफलता का उत्सव था, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा का संदेश भी था। यह आयोजन आने वाली पीढ़ियों को देशसेवा, अनुशासन और मेहनत के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता रहेगा।

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