Agriculture News : ड्रैगन फ्रूट के बीच बो दिया गेहूँ, फतेहाबाद के किसान का अनोखा प्रयोग बना मिसाल

 ड्रैगन फ्रूट के बीच गेहूँ की फसल उगाकर तैयार किया मॉडल  

हरियाणा के फतेहाबाद जिले के राजस्थान सीमा से सटे गांव दैय्यड़ के प्रगतिशील किसान सुनील कुमार बरड़वाल ने खेती में नवाचार करते हुए एक ऐसा प्रयोग किया है, जो अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनता जा रहा है। उन्होंने अपने खेत में ड्रैगन फ्रूट के पौधों के बीच गेहूँ की फसल उगाकर एक नया मॉडल तैयार किया है। इस प्रयोग से न केवल खेती की लागत कम हुई है बल्कि एक ही खेत से दो फसलों की आमदनी भी होने लगी है।

आज जब खेती में बढ़ती लागत और घटते मुनाफे को लेकर किसान परेशान हैं, ऐसे समय में सुनील बरड़वाल का यह प्रयोग किसानों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आया है। उन्होंने आधुनिक खेती की तकनीक को पारंपरिक तरीकों के साथ जोड़कर यह दिखा दिया है कि सही योजना और मेहनत से खेती को लाभकारी बनाया जा सकता है।

तीन साल पहले शुरू की ड्रैगन फ्रूट की खेती

किसान सुनील कुमार बरड़वाल ने बताया कि करीब तीन साल पहले उन्होंने अपनी लगभग दो एकड़ जमीन में ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की थी। शुरुआत में यह उनके लिए एक नया अनुभव था, क्योंकि इस क्षेत्र में पहले बहुत कम किसान इस फसल की खेती करते थे। लेकिन उन्होंने जोखिम उठाते हुए इस फसल को अपनाया और इसकी सही तरीके से देखभाल की।

ड्रैगन फ्रूट की खेती में पौधों को सहारा देने के लिए विशेष प्रकार के सीमेंट या लोहे के पोल लगाए जाते हैं। इसके साथ ही पौधों की नियमित देखभाल और सिंचाई की व्यवस्था भी करनी पड़ती है। सुनील बरड़वाल ने इन सभी बातों का ध्यान रखते हुए अपने खेत में ड्रैगन फ्रूट के पौधों को विकसित किया।

कुछ ही समय में पौधे अच्छी तरह बढ़ने लगे और उत्पादन भी शुरू हो गया। ड्रैगन फ्रूट की बाजार में अच्छी कीमत मिलने के कारण उन्हें इससे लाखों रुपये की आय होने लगी। इससे उनका उत्साह और भी बढ़ा और उन्होंने खेती में नए प्रयोग करने का फैसला किया।

ड्रैगन फ्रूट के बीच शुरू की गेहूँ की खेती

सुनील बरड़वाल ने देखा कि ड्रैगन फ्रूट के पौधों के बीच काफी जगह खाली रहती है। उन्होंने सोचा कि अगर इस खाली जमीन का सही उपयोग किया जाए तो अतिरिक्त आय प्राप्त की जा सकती है। इसी सोच के साथ उन्होंने इंटरक्रॉपिंग तकनीक अपनाने का निर्णय लिया।

इंटरक्रॉपिंग का मतलब है एक ही खेत में एक से अधिक फसलों की खेती करना। इससे खेत की जमीन का पूरा उपयोग होता है और किसान को एक से अधिक फसलों से आय मिलती है।

इस बार सुनील बरड़वाल ने ड्रैगन फ्रूट के पौधों के बीच 306 वैरायटी का गेहूँ बोया है। यह गेहूँ की एक अच्छी किस्म मानी जाती है, जो बेहतर उत्पादन देने के लिए जानी जाती है।

पांच फुट तक पहुंच चुकी है गेहूँ की फसल

किसान के अनुसार गेहूँ की फसल अब काफी अच्छी तरह विकसित हो चुकी है। खेत में खड़ी गेहूँ की फसल की ऊंचाई करीब पांच फुट तक पहुंच गई है, जिससे इस बार अच्छी पैदावार की उम्मीद जताई जा रही है।

ड्रैगन फ्रूट के पौधों के बीच गेहूँ की खेती होने से जमीन का बेहतर उपयोग हो रहा है। इससे खेत खाली नहीं रहता और किसान को एक ही खेत से दो अलग-अलग फसलों का लाभ मिलता है।

ऊंट से करवाई गेहूँ की बिजाई

इस खेती की एक और खास बात यह है कि गेहूँ की बिजाई आधुनिक मशीनों की बजाय पारंपरिक तरीके से ऊंट के माध्यम से करवाई गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में पहले इस तरह से ही खेती की जाती थी, लेकिन धीरे-धीरे यह तरीका कम होता गया।

सुनील बरड़वाल ने पुराने तरीकों को अपनाते हुए ऊंट के जरिए खेत में गेहूँ की बिजाई करवाई। इससे खेती की लागत भी कम रही और खेत में मिट्टी की संरचना भी सुरक्षित बनी रही।

पूरी तरह आर्गेनिक खेती

किसान सुनील बरड़वाल की खेती की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वह अपनी फसल को पूरी तरह आर्गेनिक तरीके से तैयार कर रहे हैं। उन्होंने गेहूँ की फसल में किसी भी प्रकार की रासायनिक खाद या केमिकल का उपयोग नहीं किया है।

फसल की बढ़वार के लिए केवल जैविक खाद और प्राकृतिक तरीकों का इस्तेमाल किया गया है। इसके अलावा सिंचाई के लिए भी अब तक केवल एक बार ही पानी दिया गया है, जिससे पानी की बचत भी हो रही है और लागत भी कम हो रही है।

आज के समय में जहां रासायनिक खेती से मिट्टी की उर्वरता कम होती जा रही है, वहीं सुनील बरड़वाल का यह प्रयोग प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने वाला माना जा रहा है।

इंटरक्रॉपिंग से बढ़ सकती है किसानों की आय

सुनील बरड़वाल का कहना है कि अगर किसान सही योजना बनाकर खेती करें तो कम लागत में भी अच्छा उत्पादन लिया जा सकता है। ड्रैगन फ्रूट जैसे बागवानी पौधों के बीच दूसरी फसल लेकर किसान अपनी आय को काफी हद तक बढ़ा सकते हैं।

उनका मानना है कि इस तरह की खेती से जोखिम भी कम हो जाता है। अगर किसी कारण से एक फसल में नुकसान हो जाए तो दूसरी फसल से आय हो जाती है।

मिल चुका है सर्वश्रेष्ठ किसान का पुरस्कार

खेती में नवाचार और उत्कृष्ट कार्य के लिए सुनील कुमार बरड़वाल को दिल्ली में सर्वश्रेष्ठ किसान का पुरस्कार भी मिल चुका है। यह सम्मान उन्हें खेती में नए प्रयोग करने और अन्य किसानों को प्रेरित करने के लिए दिया गया था।

उनके इस प्रयोग को देखने के लिए आसपास के कई किसान भी उनके खेत पर पहुंचते हैं और उनसे खेती के तरीके सीखते हैं। कई किसान अब इस मॉडल को अपनाने की तैयारी कर रहे हैं।

अन्य किसानों के लिए प्रेरणा

गांव दैय्यड़ में किया गया यह प्रयोग साबित करता है कि खेती में नई सोच और मेहनत से बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। सुनील बरड़वाल ने यह दिखा दिया है कि अगर किसान पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक को मिलाकर काम करें तो खेती को लाभकारी व्यवसाय बनाया जा सकता है।

आज उनके इस प्रयोग से आसपास के किसान भी प्रेरित हो रहे हैं और नई फसलों तथा इंटरक्रॉपिंग तकनीक को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

विशेषज्ञों का भी मानना है कि आने वाले समय में ऐसी बहुफसली और आर्गेनिक खेती किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

सुनील बरड़वाल का यह प्रयोग न केवल फतेहाबाद बल्कि पूरे क्षेत्र के किसानों के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बन गया है, जो यह संदेश देता है कि नई सोच, मेहनत और प्राकृतिक खेती के जरिए खेती को लाभ का सौदा बनाया जा सकता है।

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