दीपलाना-पारीक परिवार की सादगीपूर्ण शादी बनी क्षेत्र में मिसाल, समाज को दिया सकारात्मक संदेश
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| नोहर तहसील के गांव दीपलाना में एक सादगीपूर्ण शादी |
दीपलाना और चोहिलांवाली के पारीक परिवारों ने इस विवाह के माध्यम से समाज को यह दिखाया कि बेटी ही सबसे बड़ा धन है और विवाह का आधार प्रेम, सम्मान और संस्कार होना चाहिए, न कि दहेज। दरअसल, दीपलाना गांव निवासी नरेन्द्र पारीक पुत्र सुरजमल पारीक की पुत्री प्रसुन निशु पारीक का विवाह 9 मार्च को चोहिलांवाली निवासी महावीर पारीक के पुत्र डॉ. विकास पारीक के साथ धूमधाम के साथ सादगीपूर्ण माहौल में सम्पन्न हुआ। इस विवाह की सबसे खास बात यह रही कि दूल्हा पक्ष ने दहेज के रूप में केवल एक रुपया और नारियल स्वीकार करते हुए बाकी सभी राशि लौटा दी।
साढ़े 11 लाख रुपये लौटाकर दिया बड़ा संदेश
विवाह के दौरान दुल्हन पक्ष की ओर से परंपरा के अनुसार दहेज के रूप में थाली में करीब साढ़े 11 लाख रुपये रखी। लेकिन जैसे ही यह राशि दूल्हा पक्ष को देने की बात आई, तो दूल्हे के पिता महावीर पारीक ने दहेज राशि यह कहते हुए मना कर दी कि हमारे लिए दुल्हन ही दहेज है। हम रुपये नहीं लेंगे। उन्होंने केवल एक रुपया और नारियल स्वीकार करते हुए पूरी राशि वापस लौटा दी। इस दौरान महावीर पारीक ने कहा कि दुल्हन ही सबसे बड़ा दहेज है। बेटी को सम्मान देना ही असली परंपरा है। हमें किसी प्रकार के धन या सामान की आवश्यकता नहीं है। उनके इस निर्णय ने वहां मौजूद सभी लोगों को भावुक कर दिया और पूरे समारोह में तालियों की गूंज सुनाई दी।
बेटी को लक्ष्मी मानकर किया सम्मान
दूल्हा पक्ष ने साफ शब्दों में कहा कि बेटी को वे अपने घर की लक्ष्मी मानकर स्वीकार कर रहे हैं। उनका कहना था कि बेटी अपने माता-पिता का घर छोड़कर नए परिवार को संवारने के लिए आती है, इसलिए उसका सम्मान ही सबसे बड़ा दहेज होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि आज के समय में दहेज प्रथा समाज के लिए एक गंभीर समस्या बन चुकी है, जिसके कारण कई परिवार आर्थिक बोझ और सामाजिक दबाव का सामना करते हैं। ऐसे में यदि समाज के लोग मिलकर इस कुरीति को समाप्त करने का संकल्प लें तो आने वाली पीढ़ियों को बेहतर समाज मिल सकता है।
समाज के लोगों ने की सराहना
इस विवाह में उपस्थित समाज के लोगों और अतिथियों ने दूल्हा पक्ष के इस निर्णय की खुलकर सराहना की। सभी ने इसे समाज के लिए एक प्रेरणादायक कदम बताया। डाक विभाग से सेवानिवृत्त मदनलाल पारीक तथा वैद्य रामस्वरूप पारीक ने चोहिलांवाली पारीक परिवार की इस पहल की प्रशंसा करते हुए कहा कि आज के समय में ऐसे उदाहरण बहुत कम देखने को मिलते हैं। उन्होंने कहा कि बेटी को सबसे बड़ा धन मानकर विवाह करना वास्तव में समाज के लिए अनुकरणीय है। उन्होंने कहा कि यदि इसी प्रकार समाज के अन्य लोग भी आगे आएं और दहेज लेने से इंकार करें, तो दहेज प्रथा जैसी कुरीति को जड़ से समाप्त किया जा सकता है।
दीपलाना के पारीक परिवार ने जताया आभार
वहीं दीपलाना निवासी पारीक परिवार ने भी चोहिलावाली पारीक परिवार के इस सराहनीय कदम के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि दूल्हा पक्ष द्वारा लिया गया यह निर्णय केवल उनके परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए गर्व की बात है। परिवार के सदस्यों ने कहा कि विवाह जीवन का सबसे महत्वपूर्ण संस्कार होता है और इसे सादगी, प्रेम और सम्मान के साथ सम्पन्न किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इस विवाह ने समाज को एक सकारात्मक दिशा में सोचने के लिए प्रेरित किया है।
नवदंपति ने युवाओं से की अपील
विवाह के बाद डॉ. विकास पारीक और प्रसुन निशु पारीक ने भी युवाओं से समाज में फैली कुरीतियों को समाप्त करने की अपील की। उन्होंने कहा कि युवा वर्ग यदि ठान ले तो समाज में बड़ा बदलाव संभव है। नवदंपति ने कहा कि दहेज प्रथा के कारण कई परिवारों को आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में युवाओं को आगे आकर इस कुरीति का विरोध करना चाहिए और सादगीपूर्ण विवाह को बढ़ावा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि विवाह का असली उद्देश्य दो परिवारों का मिलन और एक नया जीवन शुरू करना होता है। इसमें धन-दौलत या दिखावे की कोई आवश्यकता नहीं होती।
सादगीपूर्ण विवाह बना चर्चा का विषय
दीपलाना और आसपास के गांवों में यह विवाह इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग इस पहल को समाज में बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह के उदाहरण समाज में नई सोच पैदा करते हैं। जब लोग देखेंगे कि बिना दहेज के भी विवाह खुशी-खुशी सम्पन्न हो सकता है, तो धीरे-धीरे यह सोच समाज में फैलने लगेगी।
पारीक परिवार का प्रयास दहेज प्रथा के खिलाफ मजबूत संदेश
भारत में दहेज प्रथा लंबे समय से एक सामाजिक समस्या बनी हुई है। कई परिवार अपनी बेटियों की शादी के लिए भारी कर्ज तक ले लेते हैं, जिससे उन्हें वर्षों तक आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ती है। ऐसे में दीपलाना और चोहिलावाली के पारीक परिवारों द्वारा किया गया यह प्रयास समाज को एक सकारात्मक दिशा दिखाने वाला कदम माना जा रहा है। समाज के प्रबुद्ध लोगों का मानना है कि यदि अधिक से अधिक परिवार इसी तरह की पहल करें तो दहेज प्रथा जैसी कुरीति को समाप्त किया जा सकता है।
समाज के लिए प्रेरणादायक बना विवाह
यह विवाह केवल दो परिवारों का रिश्ता नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव की दिशा में एक मजबूत पहल बनकर सामने आया है। दूल्हा पक्ष द्वारा केवल एक रुपया और नारियल लेकर विवाह सम्पन्न करना यह साबित करता है कि संस्कार और सम्मान ही जीवन के असली मूल्य हैं। आज जब कई शादियों में दिखावा और खर्च बढ़ता जा रहा है, ऐसे समय में यह सादगीपूर्ण विवाह समाज के लिए एक प्रेरणा बन गया है। दीपलाना और चोहिलावाली पारीक परिवार की यह पहल आने वाले समय में कई लोगों को दहेज प्रथा के खिलाफ खड़े होने का साहस दे सकती है।

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