नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार का 15वां केंद्रीय बजट संसद में पेश करेंगी। यह 2024 में एनडीए सरकार के लगातार तीसरी बार सत्ता में आने के बाद दूसरा पूर्ण बजट होगा। इसके साथ ही निर्मला सीतारमण देश की पहली महिला वित्त मंत्री बन जाएंगी, जो लगातार नौवीं बार बजट प्रस्तुत करेंगी। खास बात यह है कि पिछले एक दशक में पहली बार यूनियन बजट रविवार के दिन पेश किया जा रहा है।
अर्थशास्त्रियों और नीति विशेषज्ञों के मुताबिक, इस बजट में रक्षा, बुनियादी ढांचा, पूंजीगत खर्च (कैपेक्स), बिजली क्षेत्र और किफायती आवास (अफोर्डेबल हाउसिंग) पर विशेष जोर रहने की उम्मीद है। साथ ही सरकार सामाजिक कल्याण और वित्तीय अनुशासन के बीच संतुलन बनाए रखने की रणनीति अपनाएगी।
वैश्विक स्तर पर जारी अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच नीति निर्धारकों के सामने विकास को गति देने और राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने की दोहरी चुनौती है। विशेषज्ञों का मानना है कि बजट में आर्थिक विकास की रफ्तार बनाए रखने और राजकोषीय घाटे को काबू में रखने के बीच संतुलन साधने की कोशिश की जाएगी।
सरकार पिछले कुछ वर्षों से राजकोषीय सुदृढ़ीकरण के मार्ग पर आगे बढ़ रही है। कोविड-19 महामारी के दौरान राजकोषीय घाटा 9.2 प्रतिशत के उच्च स्तर तक पहुंच गया था, जिसे घटाकर अनुमानित रूप से वित्त वर्ष 2025-26 में 4.4 प्रतिशत तक लाया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, सरकार इस दिशा में वित्तीय अनुशासन को बनाए रखेगी और किसी बड़े बदलाव की संभावना कम है।
बजट 2026-27 की तैयारियों के अंतिम चरण के तहत 27 जनवरी को नॉर्थ ब्लॉक स्थित बजट प्रेस में हलवा सेरेमनी आयोजित की गई थी, जिसमें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण उपस्थित रहीं। इसके बाद बजट से जुड़े अधिकारी ‘लॉक-इन’ प्रक्रिया में प्रवेश करते हैं। वहीं, सरकार की अर्थव्यवस्था पर वार्षिक रिपोर्ट इकोनॉमिक सर्वे 2026 को 29 जनवरी को संसद में पेश किया गया।
इकोनॉमिक सर्वे के अनुसार, मजबूत मैक्रो-आर्थिक स्थिति और निरंतर संरचनात्मक सुधारों के चलते वित्त वर्ष 2027 में भारतीय अर्थव्यवस्था के 6.8 से 7.2 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है। ऐसे में आज पेश होने वाला बजट देश की आर्थिक दिशा और विकास प्राथमिकताओं को तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।

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