Haryana Breaking News : 216वां स्थापना महोत्सव: कागदाना मंदिर में बाबा रामदेव जी के भव्य उत्सव और श्रद्धालुओं की भारी भीड़

श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया 216वां स्थापना महोत्सव

प्राचीन कागदाना मंदिर में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया 216वां स्थापना महोत्सव

चोपटा। क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक आस्था का प्रमुख केंद्र माने जाने वाले प्राचीन श्री बाबा रामदेव जी महाराज मंदिर, कागदाना में माघ सुदी दशमी के पावन अवसर पर 216वां स्थापना महोत्सव पूरे श्रद्धा, उल्लास और भक्ति भाव के साथ मनाया गया। इस ऐतिहासिक अवसर पर गांव कागदाना सहित आसपास के अनेक गांवों से हजारों श्रद्धालु बाबा के दर्शन और आशीर्वाद लेने पहुंचे।

स्थापना महोत्सव को लेकर मंदिर परिसर को विशेष रूप से सजाया गया। पूरे मंदिर क्षेत्र को रंग-बिरंगे फूलों, आकर्षक विद्युत लडि़यों और सजावटी सामग्री से भव्य रूप दिया गया, जिससे मंदिर की शोभा देखते ही बनती थी। सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें मंदिर परिसर में देखने को मिलीं और दिनभर जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा।

बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए


श्रृंगार आरती और छप्पन भोग से हुई शुरुआत

मंदिर के पुजारी अशोक पारीक ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रातः सुबह 7:15 बजे श्रृंगार आरती संपन्न कराई गई। इसके बाद बाबा रामदेव जी महाराज को छप्पन भोग अर्पित किए गए। धार्मिक विधि-विधान और मंत्रोच्चार के बीच पूजा-अर्चना की गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।

श्रृंगार आरती के पश्चात भंडारे का शुभारंभ किया गया, जो बाबा की इच्छा तक लगातार चलता रहा। भंडारे में श्रद्धालुओं के लिए शुद्ध और सात्विक प्रसाद की व्यवस्था की गई थी। श्रद्धालुओं ने पंक्तिबद्ध होकर प्रसाद ग्रहण किया और बाबा के प्रति अपनी आस्था प्रकट की।

भजनों से गूंजा मंदिर परिसर

स्थापना महोत्सव के दौरान भजन संध्या का भी आयोजन किया गया। प्रसिद्ध भजन गायक पटेल मालिया ने अपनी मधुर वाणी से बाबा रामदेव जी की महिमा का गुणगान किया। “रामसा पीर की जय” के जयकारों के साथ भक्ति रस से ओत-प्रोत भजनों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। कई श्रद्धालु भजनों पर झूमते और नृत्य करते नजर आए, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।

आकर्षक झांकियां बनी श्रद्धा का केंद्र

महोत्सव के अवसर पर मंदिर परिसर में विभिन्न धार्मिक झांकियां भी सजाई गईं। इन झांकियों में बाबा रामदेव जी के जीवन से जुड़े प्रसंगों और लोक आस्था को दर्शाया गया। झांकियों को देखने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। बच्चों और बुजुर्गों ने भी इन झांकियों में विशेष रुचि दिखाई।

इस दौरान कई भक्तों द्वारा बाबा को चांदी के छत्र अर्पित किए गए, वहीं सवामणि का प्रसाद भी श्रद्धापूर्वक चढ़ाया गया। भक्तों ने बाबा से अपने परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और क्षेत्र की खुशहाली की कामना की।

मेला गाऊंड में रही विशेष रौनक

स्थापना महोत्सव के साथ आयोजित मेला गाऊंड में भी खासा उत्साह देखने को मिला। बच्चों के लिए झूले लगाए गए, वहीं खिलौनों, मिठाइयों और फलों की दुकानों ने मेले की शोभा बढ़ाई। ग्रामीणों और आसपास से आए परिवारों ने मेले का भरपूर आनंद लिया। बच्चों में मेले को लेकर विशेष उत्साह देखा गया, जिससे पूरा क्षेत्र उत्सव के रंग में रंगा नजर आया।

पुलिस टीम के साथ मंदिर परिसर और मेला गाऊंड में तैनात 


सुरक्षा व्यवस्था रही चाक-चौबंद

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। नाथूसरी चौपरा थाना प्रभारी प्रदीप कुमार अपनी पूरी पुलिस टीम के साथ मंदिर परिसर और मेला गाऊंड में तैनात रहे। पुलिस प्रशासन द्वारा यातायात, भीड़ नियंत्रण और शांति व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया, जिससे पूरा आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।

ग्रामीणों, युवाओं और महिलाओं का रहा अहम योगदान

स्थापना महोत्सव को सफल बनाने में समस्त ग्रामीणों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। विशेष रूप से गांव के युवाओं और महिलाओं ने मंदिर में दर्शन व्यवस्था, भंडारा संचालन और मेला प्रबंधन में सक्रिय भूमिका निभाई। सभी ने मिलकर आयोजन को अनुशासित और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराया।

संस्थापक परिवार ने जताया आभार

मंदिर के संस्थापक लाला रतीराम भोलूसरिया परिवार की ओर से पुलिस प्रशासन, युवाओं और महिलाओं का सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया गया। सहयोग करने वाले सभी लोगों को सम्मानित भी किया गया। इस अवसर पर भोलूसरिया परिवार के सभी सदस्य उपस्थित रहे और उन्होंने बाबा रामदेव जी के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।


मंदिर स्थापना का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व

मंदिर के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि श्री बाबा रामदेव जी महाराज मंदिर, कागदाना की स्थापना सन् 1811 में लाला रतीराम भोलूसरिया परिवार के पूर्वजों द्वारा की गई थी। इतिहास के अनुसार, जब भोलूसरिया परिवार के पूर्वज अपने गांव भोलूसर (राजस्थान) से सिरसा की यात्रा पर निकले थे, तब उन्होंने रात्रि विश्राम गांव कागदाना में किया।

इसी दौरान उन्हें स्वप्न में बाबा रामदेव जी महाराज के दर्शन हुए। बाबा ने आदेश दिया कि जिस स्थान पर उनके घोड़े के खुरों के निशान मिलें, उसी स्थान पर मंदिर की स्थापना की जाए। अगली सुबह बताए गए स्थान पर घोड़े के खुरों के निशान मिले और बाबा के आदेशानुसार माघ शुदी दशमी, विक्रम संवत 1868 (सन् 1811) को इस प्राचीन मंदिर की स्थापना की गई।

स्थापना के दिन से लेकर आज तक मंदिर परिसर का निर्माण, विस्तार और रख-रखाव भोलूसरिया परिवार द्वारा ही बाबा की कृपा से किया जा रहा है। इस मंदिर की एक विशेष परंपरा यह भी है कि इसके निर्माण और रख-रखाव के लिए किसी भी व्यक्ति या संस्था से किसी प्रकार का दान स्वीकार नहीं किया जाता, जो इसकी धार्मिक मर्यादा और परंपरा को दर्शाता है।

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