Gogamedi Truth: TRP के लिए मंदिर को बनाया गया ‘Controversy Point’? गोेगामेड़ी मंदिर मामला

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गोेगामेड़ी (राजस्थान/हरियाणा सीमा)। जाहरवीर गोगा जी महाराज का गोेगामेड़ी मंदिर और उसके समीप स्थित गोरख बाबा का टिला उत्तर भारत ही नहीं, बल्कि पूरे देश में आस्था का बड़ा केंद्र माना जाता है। हर साल यहां विशाल मेला लगता है, जो करीब तीन महीनों तक चलता है। इस दौरान हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, बिहार, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, झारखंड, उत्तराखंड, हिमाचल समेत कई राज्यों से करोड़ों श्रद्धालु धोक लगाने पहुंचते हैं। up to date

मंदिर परिसर में गोगा जी महाराज की समाधि स्थित है। यहां पूजा-पाठ पूरी तरह से हिंदू रीति-रिवाजों के अनु सार होती है—ज्योत, बत्ती, अगरबत्ती, प्रसाद, नारियल, ध्वजा चढ़ाई जाती है। मंदिर के बाहर कई हवन कुंड बने हैं, जहां श्रद्धालु स्वयं हवन और पूजा करते हैं। मंदिर परिसर और आसपास की लिखाई में हिंदी के साथ कुछ पुराने फारसी/उर्दू शब्द भी दिखाई देते हैं, जो इस क्षेत्र की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा रहे हैं। up to date

पीढ़ियों का लेखा-जोखा भी लंबे समय से दोनों समुदायों में दर्ज

स्थानीय लोगों के अनुसार, जाहरवीर गोगा जी की मान्यता सदियों से हिंदू, मुस्लिम और सिख—तीनों समुदायों में रही है। 1947 से पहले की कई शैक्षणिक और सामाजिक संस्थाओं पर हिंदी, उर्दू और फारसी का साथ-साथ प्रयोग आम बात थी। यही नहीं, यहां पीढ़ियों का लेखा-जोखा भी लंबे समय से दोनों समुदायों में दर्ज होता आया है। इतने वर्षों में लाखों-करोड़ों श्रद्धालुओं के आने के बावजूद कभी भी मंदिर परिसर में हिंदू-मुस्लिम-सिख का विवाद नहीं हुआ।up to date

हालांकि, हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो ने विवाद खड़ा करने की कोशिश की है। वीडियो में रिद्धिमा शर्मा नाम की युवती मंदिर को “मजार” बताकर यहां मुस्लिम ढंग से पूजा होने का दावा कर रही है। वह जाहरवीर गोगा जी को “जाहरपीर” बताती नजर आती है और सड़क पर लगे एक बोर्ड की फोटो के आधार पर भ्रम फैलाने का प्रयास करती है। जबकि स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिर के ऊपर नाम हमेशा से “जाहरवीर” ही रहा है और पूजा-पद्धति भी हिंदू रीति से ही होती है।up to date

 स्थानीय ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने कड़ा विरोध जताया

वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने कड़ा विरोध जताया। लोगों का कहना है कि यह जगह सदियों से साझा आस्था का प्रतीक रही है और यहां किसी भी तरह का सांप्रदायिक विभाजन स्वीकार नहीं किया जाएगा। मौके पर मौजूद लोगों ने वीडियो बनाने वालों को स्पष्ट शब्दों में कहा कि यहां हिंदू-मुस्लिम का खेल न किया जाए। स्थानीय जानकारों का आरोप है कि कुछ लोग केवल सुर्खियों, टीआरपी और सोशल मीडिया फॉलोअर्स बढ़ाने के लिए धार्मिक स्थलों को विवाद का विषय बना रहे हैं। उनका मानना है कि आज के समय में नफरत फैलाकर वायरल होना आसान तरीका बन गया है, जबकि जमीनी सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है।up to date

सांझी संस्कृति को तोड़ने की कोशिश

हरियाणा और आसपास के इलाकों में आज भी कई गांवों में पीर बाबाओं के थान और मंदिर हैं, जहां मुस्लिम आबादी न होने के बावजूद लोग श्रद्धा से जाते हैं और अपने-अपने रीति-रिवाजों से पूजा करते हैं। सदियों से चली आ रही इस सांझी संस्कृति को तोड़ने की कोशिशों पर समाज के प्रबुद्ध वर्ग ने चिंता जताई है।up to date

स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं की एक ही अपील है—धर्म, जाति और संप्रदाय इंसानों की बनाई सीमाएं हैं, इन्हें भगवान और आस्था पर न थोपा जाए। गूगामेड़ी जैसे तीर्थ स्थल नफरत नहीं, बल्कि भाईचारे और साझा विश्वास की मिसाल हैं।up to date 

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