Surajkumd Craft Mela : Eco-Friendly जूट Products: पर्यटकों को लुभा रहे हैं बुलाती है मगर जाने का नहीं... जैसे जुट के थैले

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फरीदाबाद। अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड आत्मनिर्भर शिल्प मेला इस बार भी देश-विदेश की कला, संस्कृति और हस्तशिल्प का भव्य संगम बना हुआ है। मेले में जहां एक ओर पारंपरिक शिल्प आकर्षण का केंद्र हैं, वहीं दूसरी ओर पर्यावरण-अनुकूल जूट उत्पाद पर्यटकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं।

मेले की छोटी चौपाल के पास स्थित स्टाल नंबर 644 इन दिनों खास चर्चा में है। यहां जूट से बने आकर्षक और टिकाऊ उत्पादों को देखने और खरीदने के लिए पर्यटकों की भीड़ उमड़ रही है।

15 से 20 प्रकार के जूट उत्पाद, हर जरूरत के लिए विकल्प

इस स्टाल पर जूट से बने

  • तकिया कवर
  • कुशन कवर
  • बेड कवर
  • हैंडबैग और शॉपिंग बैग
  • लैपटॉप बैग, फाइल कवर
  • टेबल मैट, पर्स
  • होम डेकोर आइटम्स

सहित 15 से 20 तरह के उत्पाद उपलब्ध हैं। ये न सिर्फ घर की सजावट को खास बनाते हैं, बल्कि रोजमर्रा के इस्तेमाल में भी बेहद उपयोगी हैं।

150 से 3500 रुपये तक कीमत, हर वर्ग के लिए कुछ खास

जूट उत्पादों की कीमत 150 रुपये से शुरू होकर 3500 रुपये तक है। किफायती दाम, आकर्षक डिजाइन और मजबूत गुणवत्ता के कारण यह स्टाल परिवारों, युवाओं और महिलाओं के बीच विशेष लोकप्रियता हासिल कर रहा है।

25 वर्षों से सूरजकुंड मेले से जुड़ा शिल्पकार

स्टाल संचालक शिल्पकार देवेंद्र कुमार ने बताया कि उनका सूरजकुंड मेले से 25 वर्षों का नाता है। वे लगातार हर साल इस मेले में भाग लेते आ रहे हैं और उनके उत्पादों को हमेशा देश-विदेश से आए पर्यटकों का भरपूर प्यार मिला है।

उन्होंने कहा कि जूट से बने उत्पाद पर्यावरण के अनुकूल, टिकाऊ और लंबे समय तक चलने वाले होते हैं। प्लास्टिक के बढ़ते विकल्प के रूप में लोग अब प्राकृतिक और स्वदेशी उत्पादों की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं, जिससे जूट की मांग लगातार बढ़ रही है।

आत्मनिर्भर भारत की सोच को दे रहा मजबूती

सूरजकुंड मेला न केवल शिल्पकारों को मंच दे रहा है, बल्कि आत्मनिर्भर भारत और पर्यावरण संरक्षण की सोच को भी मजबूती प्रदान कर रहा है। जूट उत्पादों की बढ़ती लोकप्रियता इस बात का प्रमाण है कि लोग अब जागरूक होकर प्रकृति के अनुकूल विकल्प अपना रहे हैं।

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