चौपटा के संस्थापक स्वामी हरिश्चंद्र महाराज की 23 वीं पुण्यतिथि आयोजित भंडारे में वितरित किया प्रसाद
शिव मंदिर धर्मशाला नाथूसरी चौपटा में संत सम्मेलन में में लगाया भंडारा
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| भंडारे में भोजन ग्रहण करते हुए संत व उनकी सेवा में लगे सेवादार। |
चौपटा। चौपटा के संस्थापक स्वामी हरिश्चंद्र महाराज की 23 वीं पुण्यतिथि पर वीरवार को शिव मंदिर धर्मशाला नाथूसरी चोपटा में संत सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसमें देश के कोने-कोने हरियाणा, राजस्थान, पंजाब, उत्तर प्रदेश आदि राज्यों से आए 700 संतों व क्षेत्रवासियों ने स्वामी संत हरीशचंद्र दास की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस दौरान जागरण, हवन व भंडारे का आयोजन कर श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। गद्दी आसीन संत पूर्ण दास ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। यह जानकारी देते हुए जॉनी शर्मा ने बताया कि हर वर्ष चौपटा के संस्थापक हरिश्चंद्र महाराज सूरदास की पुण्यतिथि पर संत समागम का आयोजन किया जाता है। इसी कड़ी में इस बार भी जागरण, संत सम्मेलन व हवन का आयोजन किया गया। भंडारा लगाकर प्रसाद वितरण किया गया। जागरण में गायक कलाकारों ने संतो की महिमा का गुणगान किया। संत सम्मेलन में स्वामी हरीश चंद्र दास के सामाजिक कार्यों पर प्रकाश डाला गया। चौपटा क्षेत्र के विकास में उनके योगदान को याद करते हुए संतों ने उन्हें एक महान विभूति बताया। संत सम्मेलन में आए हुए संतो को समिति द्वारा सम्मानित किया। इस मौके पर महाराज पूर्णदास, कृष्ण नंबरदार, रणजीत कासनियां, भगवान दास पंजाब, श्यामानंद, रामानंद, लिलुराम, संदीप, सावित्री, साहब राम, राजेन्द्र बरासरी, सतबीर सहारण सहित सैंकड़ों श्रद्धालू मौजूद रहे।
संत हरिश्चंद्र दास ने एक झोपड़ी से शुरू कर इस प्रकार बसाया नाथूसरी चोपटा
वर्तमान में गद्दी आसीन पूर्ण दास महाराज ने बताया कि गांव रायपुरिया में दिसंबर 1923 में रामजस के घर माता माम कोरी के कोख से जन्मे स्वर्गीय संत हरिश्चंद्र ने अपने पूर्ण जीवन काल में चौपटा के विकास की चिंता रखते हुए अपना जीवन लगा दिया। सन 2002 में 80 वर्ष की आयु में प्रभु के चरणों में लीन हो गए थे। इस महान शख्सियत की पुण्य तिथि को चोपटा क्षेत्र के लोग बड़ी श्रद्धा व आदर के साथ मना कर उन्हें अपनी सच्ची श्रद्धांजलि देते हैं। संत हरिश्चंद्र की 2 वर्ष की अल्पायु में चेचक रोग होने से नेत्र ज्योति चली गई थी और 20 वर्ष की आयु में उदासीन पंत की दीक्षा लेकर साधु बन गए। संत हरिश्चंद्र ने सर्वप्रथम गांव में ठाकुर का मंदिर बनवाया और उस समय गांव में पीने के पानी की किल्लत के चलते उन्होंने गांव में कुएं का निर्माण कर के गांव में पीने के पानी की समस्या का निदान किया। गांव में उन्होंने अपने प्रयासों से आठवीं कक्षा तक का विद्यालय बनवाया देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय चौधरी देवीलाल की संत हरिश्चंद्र के साथ घनिष्ठ मित्रता के चलते उनकी मांग पर चोपटा में एक राजकीय उच्च विद्यालय व 1978 में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान बनवाया।
अंधे व्यक्तियों के लिए स्वामी जी ने अंध विद्यालय बनवाया जिसमें अंधे व्यक्तियों को चारपाई, कुर्सी, बनाने की शिक्षा देने का कार्य शुरू किया गया। इसके बाद उन्होंने नाथूसरी कलां के प्रसिद्ध समाजसेवी रामजस कासनियां द्वारा दान में दी गई 2 एकड़ भूमि में एक शिव मंदिर पर भव्य धर्मशाला का निर्माण करवाया। अनेकों गांव में सत्संग चबूतरे बनवाए। स्वामी जी के समाज हित के कार्यों को देख कर वर्ष 1998 में समाज सेवा का पुरस्कार देकर सम्मानित किया। इन सभी सामाजिक कार्यों की लागत संत जी ने जिला में पैदल घूम घूम कर संत समाज सेवा समिति नामक संस्था का गठन किया। महान शख्स जिसने अपना सारा जीवन समाज सेवा में लगाया साल 2002 में प्रभु के चरणों में लीन हो गए। एक झोपड़ी से शुरू किया गया उनका लगाया हुआ चोपटा रूपी कस्बा एक वट वृक्ष का रूप ले चुका है। चोपटा में इस समय तहसील कार्यालय, बीडीपीओ कार्यालय, पुलिस थाना, आईटीआई, एक सरकारी व 3 निजी विद्यालय, अनाज मंडी, बस स्टैंड सहित कई संस्थान खुलने से क्षेत्र के करीब 52 गांवों को विभिन्न प्रकार की सुविधाएं मुहैया कराई जा रही है। संत हरिश्चंद्र की पुण्यतिथि पर उनके शिष्य संत पूर्ण दास महाराज व शिव मंदिर समिति ने उनकी याद में एक भव्य संत सम्मेलन का आयोजन किया है। जिसमें संतों की वाणी व भंडारा लगाकर प्रसाद वितरित किया गया।
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| संत सम्मेलन में आए हुए संतो को सम्मानित करते हुए महाराज पूर्ण दास। |



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