सिरसा जिला के ढूकड़ा का वीर सपूत देश पर न्योछावर, शहीद सुरजीत फौजी अमर

 

ढूकड़ा गांव का बेटा हुआ शहीद up to date


ढूकड़ा गांव के लिए यह अत्यंत दुखद, पीड़ादायक और हृदयविदारक समाचार है कि गांव के वीर सपूत, शस्त्र सीमा बल (एसएसबी) में तैनात जवान सुरजीत फौजी देश सेवा के दौरान वीरगति को प्राप्त हो गए। कर्तव्य पथ पर यात्रा के दौरान सेना के ट्रक पलटने से हुए हादसे में सुरजीत फौजी व तीन अन्य जवान भी शहीद हो गए। उनके शहीद होने की खबर जैसे ही गांव पहुंची, पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। नाथूसरी चौपटा क्षेत्र के गांव ढूकड़ा के जवान सुरजीत सिंह गुवाहाटी में सीवान में शहीद हो गया है।up to date

     सुरजीत सिंह शस्त्र सीमा बल (एसएसबी) में देशसेवा में तैनात थे। जो ड्यूटी के दौरान सड़क हादसे में ट्रक पलटने से शहीद हो गये। शहीद सुरजीत फौजी को कल मंगलवार को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा। बताया जा रहा है कि गांव के भंवरलाल सिंह के तीन बेटे हैं जिनमें से सुरजीत सबसे बड़ा था। जो ढूकड़ा के राजकीय स्कूल में दसवीं कक्षा पास करने के बाद वर्ष 2013 में एसएसबी में भर्ती हुए थे। सुरजीत शादीशुदा था और गांव नेजाडेला कलां में सीमा से शादी हुई थी।  सुरजीत के दो बेटे हैं। राहुल दसवीं कक्षा व अश्वनी सातवीं कक्षा में पढ़ाई करता है।  up to date



15 दिन छुट्टी बिता कर गये ड्यूटी

एसएसबी में तैनात सुरजीत सिंह 20 दिसंबर को ही 15 दिन की छुट्टी बताने के बाद ड्यूटी पर गये थे। इसी दौरान उनकी सडक हादसे में मौत हो गई। गांव में जैसे ही उनके शहीद होने की सूचना मिली। गांव में मातम छा गया। गांव के लिए यह अत्यंत पीड़ादायक, हृदयविदारक और अपूरणीय क्षति का समाचार है शहीद सुरजीत फौजी का अंतिम संस्कार मंगलवार को उनके पैतृक गांव ढूंकड़ा में पूरे सैन्य सम्मान के साथ किया जाएगा। गांव में शोक की चादर पसरी हुई है, वहीं दूसरी ओर देश के लिए बलिदान देने वाले इस वीर सपूत पर सभी को गर्व भी है। सुरजीत फौजी का असमय जाना केवल उनके परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे गांव और क्षेत्र के लिए एक अपूरणीय क्षति है। वे एक कर्तव्यनिष्ठ सैनिक होने के साथ-साथ समाज के प्रति भी गहरी जिम्मेदारी निभाते थे। up to date 

युवाओं के थे प्रेरणास्रोत

सुरजीत फौजी केवल एक साहसी सैनिक ही नहीं थे, बल्कि वे गांव के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत, मार्गदर्शक और आदर्श व्यक्तित्व थे। उन्होंने गांव में खेल ग्राउंड के लिए निरंतर प्रयास किए और आर्मी की तैयारी कर रहे बच्चों से उनका विशेष लगाव रहा। वे हमेशा युवाओं को अनुशासन, मेहनत, आत्मविश्वास और देशभक्ति के मार्ग पर आगे बढऩे की प्रेरणा देते रहे। उनका जीवन सेवा, सादगी और समर्पण का प्रतीक था। उनका सर्वोच्च बलिदान आने वाली पीढय़िों को सदैव राष्ट्र के लिए जीने और मरने की प्रेरणा देता रहेगा। up to date

सुरजीत फौजी का जीवन सेवा, सादगी और समर्पण का प्रतीक था। देश की रक्षा को उन्होंने सर्वोच्च कर्तव्य माना और उसी कर्तव्य का निर्वहन करते हुए उन्होंने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। उनका यह बलिदान आने वाली पीढ़ियों को सदैव राष्ट्र के लिए जीने और जरूरत पड़ने पर देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने की प्रेरणा देता रहेगा।

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