नशे को रोकने के लिए पुलिस, स्वास्थ्य, शिक्षा विभाग और पंचायतों के बीच तालमेल जरूरी: एडीसी सहरावत
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| बैठक की अध्यक्षता करते अतिरिक्त उपायुक्त वीरेंद्र सहरावत, साथ में पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी। |
मेडिकल संचालकों पर कसेगा शिकंजा
एडीसी ने बताया कि गांव स्तर पर पुलिस द्वारा बनाई जा रही निगरानी समितियों को और सक्रिय किया जाए। यदि इन समितियों से कोई सूचना मिलती है तो उस पर तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने मेडिकल स्टोर संचालकों की पुलिस वेरिफिकेशन के साथ-साथ सरपंचों से भी जानकारी जुटाने के निर्देश दिए। एडीसी ने कहा कि ग्राम पंचायतें और सामाजिक संगठन मिलकर प्रयास करें तो नशे के खिलाफ जल्द सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे।
स्कूलों से ड्रॉपआउट बच्चों पर रखी जाएगी निगरानी
बैठक में डिप्टी सीएमओ डॉ. पंकज शर्मा ने कहा कि जो बच्चे पढ़ाई बीच में छोड़ चुके हैं, उन पर विशेष निगरानी जरूरी है। एडीसी ने शिक्षा विभाग को निर्देश दिए कि ड्रॉपआउट बच्चों की सूची स्कूल स्तर से तैयार कर स्वास्थ्य विभाग को उपलब्ध करवाई जाए, ताकि जरूरत पड़ने पर ऐसे बच्चों की काउंसलिंग करवाई जा सके। कॉलेज स्तर पर भी इसी प्रकार की जानकारी साझा करने के निर्देश दिए गए। पुलिस अधीक्षक दीपक सहारण ने कहा कि बच्चे दिन का अधिकतर समय अध्यापकों के संपर्क में रहते हैं, जिससे नशे के शुरूआती लक्षण पहचाने जा सकते हैं। जल्द ही स्कूल प्रिंसिपल और संचालकों के साथ बैठक कर उन्हें नशा मुक्ति अभियान से जोड़ा जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि पुलिस विभाग की ओर से नशे के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने के लिए डाक्यूमेंट्री तैयार की जाएगी, जिसे जिलेभर के स्कूलों में दिखाया जाएगा।

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