सिरसा में नशे के खिलाफ बड़ा अभियान, सभी मेडिकल स्टोर संचालकों की होगी पुलिस वेरिफिकेशन

 नशे को रोकने के लिए पुलिस, स्वास्थ्य, शिक्षा विभाग और पंचायतों के बीच तालमेल जरूरी: एडीसी सहरावत

बैठक की अध्यक्षता करते अतिरिक्त उपायुक्त वीरेंद्र सहरावत, साथ में पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी।

सिरसा। Sirsa यदि कोई मेडिकल स्टोर संचालक अवैध रूप से नशीली दवाओं की बिक्री में संलिप्त पाया गया तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही जिले में कार्यरत सभी मेडिकल स्टोर संचालकों की पुलिस वेरिफिकेशन करवाई जाएगी। ये निर्देश अतिरिक्त उपायुक्त (एडीसी) वीरेंद्र सहरावत ने सोमवार को लघु सचिवालय के सभागार में आयोजित नार्कोटिक्स कोआॅर्डिनेशन कमेटी की बैठक में दिए। बैठक की अध्यक्षता करते हुए एडीसी वीरेंद्र सहरावत ने कहा कि नशे के खिलाफ अभियान को प्रभावी बनाने के लिए पुलिस, स्वास्थ्य, शिक्षा विभाग और ग्राम पंचायतों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है। उन्होंने निर्देश दिए कि ऐसे मेडिकल प्रैक्टिशनरों पर कड़ी निगरानी रखी जाए जो नशा गतिविधियों में संलिप्त हो सकते हैं। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग संयुक्त रूप से ऐसे लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ छापेमारी करें। बैठक में पुलिस अधीक्षक सिरसा दीपक सहारण, एसडीएम सिरसा राजेंद्र सिंह, एसडीएम कालांवाली मोहित कुमार, डीएसपी संजीव कुमार, उप सिविल सर्जन डॉ. पंकज शर्मा, ड्रग कंट्रोल आॅफिसर केशव वशिष्ट और डॉ. शुभम बतरा उपस्थित रहे। वहीं पुलिस अधीक्षक डबवाली निकिता खट्टर और एसडीएम डबवाली अर्पित संगल आनलाइन माध्यम से बैठक से जुड़े।

मेडिकल संचालकों पर कसेगा शिकंजा

एडीसी ने बताया कि गांव स्तर पर पुलिस द्वारा बनाई जा रही निगरानी समितियों को और सक्रिय किया जाए। यदि इन समितियों से कोई सूचना मिलती है तो उस पर तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने मेडिकल स्टोर संचालकों की पुलिस वेरिफिकेशन के साथ-साथ सरपंचों से भी जानकारी जुटाने के निर्देश दिए। एडीसी ने कहा कि ग्राम पंचायतें और सामाजिक संगठन मिलकर प्रयास करें तो नशे के खिलाफ जल्द सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे।

स्कूलों से ड्रॉपआउट बच्चों पर रखी जाएगी निगरानी

बैठक में डिप्टी सीएमओ डॉ. पंकज शर्मा ने कहा कि जो बच्चे पढ़ाई बीच में छोड़ चुके हैं, उन पर विशेष निगरानी जरूरी है। एडीसी ने शिक्षा विभाग को निर्देश दिए कि ड्रॉपआउट बच्चों की सूची स्कूल स्तर से तैयार कर स्वास्थ्य विभाग को उपलब्ध करवाई जाए, ताकि जरूरत पड़ने पर ऐसे बच्चों की काउंसलिंग करवाई जा सके। कॉलेज स्तर पर भी इसी प्रकार की जानकारी साझा करने के निर्देश दिए गए। पुलिस अधीक्षक दीपक सहारण ने कहा कि बच्चे दिन का अधिकतर समय अध्यापकों के संपर्क में रहते हैं, जिससे नशे के शुरूआती लक्षण पहचाने जा सकते हैं। जल्द ही स्कूल प्रिंसिपल और संचालकों के साथ बैठक कर उन्हें नशा मुक्ति अभियान से जोड़ा जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि पुलिस विभाग की ओर से नशे के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने के लिए डाक्यूमेंट्री तैयार की जाएगी, जिसे जिलेभर के स्कूलों में दिखाया जाएगा।

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