Breaking News : जमीन खरीदी है तो पढ़ लें! हरियाणा सरकार ने 30 लाख से ऊपर की रजिस्ट्री पर कसी नकेल

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हरियाणा सरकार ने जमीन और संपत्ति की रजिस्ट्री से जुड़े मामलों में बड़ा और सख्त कदम उठाया है। मुख्यमंत्री नायब सैनी के नेतृत्व वाली सरकार ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि पिछले 5 वर्षों में 30 लाख रुपये से अधिक मूल्य की संपत्ति की रजिस्ट्री कराने वाले सभी खरीदारों और विक्रेताओं को अपना पैन कार्ड विवरण अनिवार्य रूप से देना होगा। सरकार का मानना है कि इस फैसले से बड़े लेन-देन में पारदर्शिता बढ़ेगी, काले धन पर अंकुश लगेगा और आयकर नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित होगा। up to date

क्यों लिया गया यह फैसला

दरअसल, आयकर विभाग की जांच में सामने आया है कि हरियाणा की कई तहसीलों में महंगी संपत्तियों की खरीद-फरोख्त के दौरान पैन कार्ड की जानकारी रजिस्ट्री दस्तावेजों में दर्ज नहीं कराई गई। यह सीधे-सीधे आयकर नियमों का उल्लंघन है। नियमों के अनुसार, एक निश्चित राशि से अधिक की संपत्ति खरीदने या बेचने पर पैन कार्ड की जानकारी देना अनिवार्य होता है, ताकि लेन-देन की निगरानी की जा सके। up to date

सरकार को आशंका है कि पैन विवरण न देने के पीछे कर चोरी, बेनामी लेन-देन और काले धन की भूमिका हो सकती है। इसी को देखते हुए अब सरकार ने पुराने मामलों की भी जांच कराने का फैसला किया है।

आयकर विभाग की कार्रवाई

आयकर विभाग ने वित्त वर्ष 2019-20 से 2024-25 के बीच की संपत्ति रजिस्ट्रियों का डेटा खंगाला। जांच के दौरान पाया गया कि कई जगहों पर 30 लाख रुपये से अधिक की रजिस्ट्री में पैन कार्ड की जानकारी दर्ज नहीं है। ऐसे मामलों की पहचान कर आयकर विभाग ने उनकी पूरी सूची राजस्व विभाग को सौंप दी है। up to date

इसके बाद से ही प्रदेश का राजस्व विभाग अलर्ट मोड में आ गया है और तहसील स्तर पर सख्त निगरानी शुरू कर दी गई है।



इन 8 तहसीलों में सबसे ज्यादा मामले

राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्तायुक्त डॉ. सुमिता मिश्रा के अनुसार, जिन तहसीलों में पैन विवरण सबसे ज्यादा लंबित पाया गया है, उनमें शामिल हैं—

  • बल्लभगढ़
  • तिगांव
  • दयालपुर
  • पलवल
  • खरखौदा
  • वजीराबाद
  • फर्रूखनगर
  • मानेसर

इन सभी तहसीलों में बीते 5 वर्षों में बड़ी संख्या में महंगी संपत्तियों की रजिस्ट्री हुई, लेकिन कई मामलों में पैन कार्ड की जानकारी अधूरी या पूरी तरह गायब पाई गई। up to date

वेब-हैलरिस पोर्टल से साझा किया गया डेटा

आयकर विभाग ने यह पूरा डेटा वेब-हैलरिस पोर्टल के माध्यम से संबंधित जिलों और तहसीलों को उपलब्ध करा दिया है। अब तहसील और जिला स्तर के अधिकारी सीधे पोर्टल पर लॉगिन कर मामलों की जांच कर सकते हैं।

सरकार का उद्देश्य है कि तकनीक के जरिए रजिस्ट्री प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और पेपरलेस बनाया जाए, ताकि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे। up to date

तहसीलदारों और DC को सख्त निर्देश

सरकार ने सभी तहसीलदारों को कड़े आदेश दिए हैं कि वे अपने सर्कल रेवेन्यू ऑफिसर (CRO) लॉगिन के जरिए उपलब्ध डेटा की गहराई से जांच करें। जिन मामलों में अब तक पैन नंबर दर्ज नहीं कराया गया है, वहां संबंधित पक्षों से तुरंत पैन कार्ड की जानकारी लेकर रिकॉर्ड अपडेट कराया जाए।

साथ ही, सभी जिला उपायुक्तों (DC) को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने जिलों की तहसीलों से रिपोर्ट मंगवाएं और यह सुनिश्चित करें कि कोई भी मामला लंबित न रहे। up to date

आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा

इस फैसले का सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा जिन्होंने पिछले 5 वर्षों में महंगी जमीन या संपत्ति खरीदी या बेची है और रजिस्ट्री के समय पैन कार्ड नहीं दिया। ऐसे लोगों को अब संबंधित तहसील कार्यालय में संपर्क कर अपना पैन विवरण जमा कराना होगा। ऐसा न करने पर भविष्य में नोटिस, जुर्माना या आयकर जांच जैसी कार्रवाई भी हो सकती है। up to date

सरकार का संदेश साफ

हरियाणा सरकार का संदेश बिल्कुल साफ है—
बड़े लेन-देन में कोई ढील नहीं दी जाएगी।
पैन कार्ड अनिवार्यता के जरिए सरकार न सिर्फ कर चोरी रोकना चाहती है, बल्कि रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता और भरोसा भी बढ़ाना चाहती है। up to date आने वाले समय में इस तरह की सख्ती और बढ़ सकती है, खासकर उन मामलों में जहां संपत्ति की कीमत और आय के स्रोतों में बड़ा अंतर पाया जाएगा।

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