Sucess Story Dhandha Nyoliwala : डॉक्टरों ने कहा खेल खत्म, ढांडा ने कहा कहानी शुरू, जानिए ढांडा न्योलीवाला की पूरी कहानी

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हरियाणवी म्यूजिक इंडस्ट्री में एक अलग पहचान बना चुके ढांडा न्योलीवाला का जन्म हरियाणा के हिसार जिले के न्योली कला गांव में हुआ। उनका असली नाम भले ही लोगों को कम पता हो, लेकिन “ढांडा न्योलीवाला” नाम आज हरियाणवी यूथ के बीच एक ब्रांड बन चुका है।

ढांडा का बचपन पूरी तरह से गांव की मिट्टी, खेत-खलिहान और हरियाणवी संस्कृति के बीच बीता। गांव की सादगी, देसी माहौल और मजबूत संस्कारों ने उनके व्यक्तित्व को गहराई से प्रभावित किया। उनके परिवार ने हमेशा अनुशासन, मेहनत और आत्मसम्मान को सबसे ऊपर रखा।

खेलों से जुड़ाव और एथलीट बनने का सपना

बचपन से ही ढांडा का झुकाव खेलों की ओर था। वे पढ़ाई के साथ-साथ स्पोर्ट्स में भी काफी एक्टिव रहते थे। खासतौर पर जेवलिन थ्रो (भाला फेंक) में उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई।
ढांडा एक टैलेंटेड एथलीट थे और उन्होंने जेवलिन थ्रो में नेशनल लेवल पर मेडल भी जीता। उस समय उनका सपना था कि वे भारत के लिए इंटरनेशनल लेवल पर खेलें और देश का नाम रोशन करें। खेल ही उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा लक्ष्य बन चुका था।

स्पाइनल इंजरी और जिंदगी का सबसे कठिन दौर (2014–2016)

साल 2014 से 2016 का समय ढांडा न्योलीवाला की जिंदगी का सबसे मुश्किल दौर साबित हुआ। एक गंभीर स्पाइनल इंजरी ने उनका पूरा स्पोर्ट्स करियर खत्म कर दिया।
इस चोट की वजह से वे करीब तीन साल तक बेड पर रहे। जिस इंसान की पहचान एक फिट एथलीट के रूप में थी, वही अचानक चलने-फिरने में भी असमर्थ हो गया।
मानसिक रूप से यह समय उनके लिए बेहद दर्दनाक था। डिप्रेशन, अकेलापन और भविष्य की चिंता ने उन्हें अंदर तक तोड़ दिया। लेकिन इसी अंधेरे दौर में उनकी जिंदगी को एक नई दिशा मिलने वाली थी।

म्यूजिक की ओर रुझान और नया रास्ता

बेड पर पड़े-पड़े ढांडा ने म्यूजिक सुनना और लिखना शुरू किया। दर्द, संघर्ष और जिंदगी के अनुभव उनके शब्दों में उतरने लगे।
यहीं से म्यूजिक उनके लिए सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि हीलिंग का जरिया बन गया। शायरी और रैप के जरिए वे अपने दर्द, गुस्से और सच्चाई को बाहर निकालने लगे।
उन्हें उर्दू शायरी और हरियाणवी लोक संस्कृति का मिश्रण पसंद आया। जौन एलिया, हाफिज जलंधरी जैसे शायरों से वे काफी इंस्पायर्ड रहे।

पढ़ाई और ऑस्ट्रेलिया जाने का फैसला

ढांडा ने अपनी स्कूलिंग हिसार से पूरी की। 2016 में ग्रेजुएशन कंप्लीट करने के बाद उन्होंने 2018 में ऑस्ट्रेलिया जाने का फैसला लिया।
ऑस्ट्रेलिया में उन्होंने क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी (QUT) में मैकेनिकल इंजीनियरिंग में दाखिला लिया। लेकिन दिल म्यूजिक में ही अटका हुआ था।
कुछ समय बाद उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी और म्यूजिक को अपना फुल-टाइम करियर बनाने का जोखिम उठाया।

संघर्ष के दिन: ट्रक ड्राइवर से फैक्ट्री वर्कर तक

ऑस्ट्रेलिया में जिंदगी आसान नहीं थी। म्यूजिक को फंड करने के लिए ढांडा ने ट्रक ड्राइवर, फैक्ट्री वर्कर और कई छोटे-बड़े जॉब्स किए।
दिन में मेहनत-मजदूरी और रात में म्यूजिक – यही उनकी दिनचर्या बन गई। वे अपनी कमाई का ज्यादातर हिस्सा स्टूडियो, रिकॉर्डिंग और म्यूजिक वीडियो पर खर्च कर देते थे।
यह दौर उनके संघर्ष, धैर्य और जुनून की सबसे बड़ी मिसाल है।

म्यूजिक करियर की शुरुआत (2020)

ढांडा न्योलीवाला ने अपने म्यूजिक करियर की शुरुआत 2020 में हरियाणवी सॉन्ग “Afgan” से की। यह गाना हरियाणवी ऑडियंस को काफी पसंद आया और धीरे-धीरे उनकी पहचान बनने लगी।
उनका स्टाइल बाकी सिंगर्स से अलग था – मॉडर्न रैप, ट्रैप बीट्स और देसी हरियाणवी फ्लेवर।

“Up To U” और ग्लोबल पहचान

साल 2022 में रिलीज हुआ सॉन्ग “Up To U” ढांडा की जिंदगी का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।
इस गाने को उन्होंने ड्राइविंग के दौरान लिखा और रिकॉर्ड किया। इंस्टाग्राम रील्स पर यह गाना वायरल हो गया और यूट्यूब पर इसे 75 मिलियन से ज्यादा व्यूज मिले।
“Up To U” ने ढांडा को सिर्फ हरियाणा ही नहीं, बल्कि इंटरनेशनल लेवल पर पहचान दिलाई।

इंटरनेशनल कोलैबोरेशन और नई ऊंचाइयां

ढांडा न्योलीवाला पहले ऐसे हरियाणवी रैपर बने जिन्होंने इंग्लिश आर्टिस्ट्स के साथ कोलैबोरेशन किया।
“Yamaha” सॉन्ग में LightSkin Jonas के साथ उनकी जुगलबंदी को काफी सराहा गया।
उन्होंने ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और न्यूजीलैंड जैसे देशों में लाइव शोज किए, जो किसी हरियाणवी आर्टिस्ट के लिए बड़ी उपलब्धि है।

बड़े सॉन्ग्स और कोलैबोरेशन

ढांडा ने कई हिट सॉन्ग्स दिए, जिनमें शामिल हैं:

  • Chora Baba Ka (2023) – रफ्तार के साथ

  • Jat Clan – योगी औलख के साथ

  • Bonjour और Regret (2023)

  • Ego Killer (2024)

इन गानों ने उनकी वर्सेटिलिटी और म्यूजिक समझ को साबित किया।

हरियाणवी ट्रैप म्यूजिक का चेहरा

ढांडा न्योलीवाला ने हरियाणवी ट्रैप म्यूजिक को नई पहचान दी। वे ट्रेडिशनल हरियाणवी बीट्स को मॉडर्न रैप और इंटरनेशनल साउंड के साथ मिक्स करते हैं।
उनके गानों में सिर्फ swag नहीं, बल्कि सोशल इश्यूज भी होते हैं – जैसे किसानों की समस्याएं, सिस्टम में करप्शन और समाज की सच्चाई।

विवाद और विवादों पर प्रतिक्रिया

ढांडा का हरियाणवी सिंगर केडी (कुलबीर दनोदा) के साथ विवाद भी चर्चा में रहा। यह विवाद “Backbite” सॉन्ग और “दांडा” शब्द के इस्तेमाल को लेकर था।
दोनों कलाकारों ने एक-दूसरे पर तंज कसे, लेकिन ढांडा ने साफ कहा कि उनकी कोई पर्सनल दुश्मनी नहीं है।

निजी जिंदगी, संघर्ष और वैल्यूज

2010 से 2018 के बीच ढांडा को गलत संगत, लीगल इश्यूज और कोर्ट केस जैसे कई चैलेंजेज का सामना करना पड़ा।
इस मुश्किल समय में उनके पिता उनके सबसे बड़े सपोर्ट सिस्टम बने और उन्हें सही रास्ते पर वापस लाए।
2024 में ढांडा ने एक बेटिंग कंपनी की मोटी डील ठुकरा दी, क्योंकि वे अपनी वैल्यूज और सिद्धांतों से समझौता नहीं करना चाहते थे।

निष्कर्ष

ढांडा न्योलीवाला की कहानी सिर्फ एक सिंगर या रैपर की नहीं है, बल्कि संघर्ष, आत्मविश्वास और दोबारा खड़े होने की कहानी है।
एक नेशनल लेवल एथलीट से लेकर ग्लोबल हरियाणवी रैपर बनने तक का उनका सफर लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है।
वे आज भी अपने गांव, अपनी मिट्टी और अपनी संस्कृति से जुड़े हुए हैं और हरियाणवी म्यूजिक को दुनिया के कोने-कोने तक ले जाने का सपना देख रहे हैं।

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