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| सरकारी भर्ती व्यवस्था up To Date |
राजस्थान में सरकारी भर्तियों की विश्वसनीयता एक बार फिर कठघरे में खड़ी हो गई है। राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSMSSB) में OMR शीट बदलने से जुड़े हालिया खुलासों ने न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि लाखों युवाओं के भविष्य को भी अनिश्चितता में डाल दिया है। SOG (स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप) की रिपोर्ट के अनुसार यह गड़बड़ी कोई नई नहीं, बल्कि 2018 से शुरू होकर 2026 तक लगातार चलती रही, जो राज्य की परीक्षा प्रणाली के लिए बेहद चिंताजनक संकेत है।
✦ SOG रिपोर्ट ने खोली वर्षों पुरानी परतें
SOG की जांच में सामने आया है कि OMR शीट से छेड़छाड़ का यह खेल कई वर्षों से योजनाबद्ध तरीके से चल रहा था। सबसे गंभीर तथ्य यह है कि जिन कर्मचारियों पर इस फर्जीवाड़े में शामिल होने के आरोप हैं, वे 2024 और 2025 में भी राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड में पदस्थ और सक्रिय थे।
इससे यह आशंका और मजबूत होती है कि हाल के वर्षों में आयोजित कई परीक्षाओं की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है।
✦ राजनीति के केंद्र में भर्ती घोटाला
OMR शीट घोटाले के खुलासे के बाद यह मामला केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक बहस का विषय भी बन गया है।
कांग्रेस पार्टी का आरोप है कि वर्तमान भाजपा सरकार इस गंभीर मुद्दे को न्याय सुनिश्चित करने के बजाय राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है। कांग्रेस का कहना है कि निष्पक्ष जांच के बजाय केवल कांग्रेस शासनकाल में हुई परीक्षाओं को कठघरे में खड़ा किया जा रहा है, जबकि गड़बड़ी वर्षों से चली आ रही है।
✦ कांग्रेस सरकार के दौरान उठाए गए सख्त कदम
कांग्रेस का दावा है कि उसके शासनकाल में पेपर लीक और भर्ती घोटालों के खिलाफ इतिहास में पहली बार कड़े और ठोस कदम उठाए गए।
सरकार ने देश में सबसे सख्त कानून बनाते हुए:
पेपर लीक में दोषी पाए जाने पर उम्रकैद की सजा
दोषियों की संपत्ति जब्त करने का प्रावधान
10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का कानून
RPSC के एक सदस्य की गिरफ्तारी, जो अपने आप में ऐतिहासिक कदम था
इसके अलावा, SOG द्वारा 250 से अधिक गिरफ्तारियां की गईं और कई पेपर लीक माफियाओं की अवैध संपत्तियों पर बुलडोजर कार्रवाई भी की गई।
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✦ युवाओं के हित में परीक्षाएं रद्द करने का फैसला
कांग्रेस सरकार का यह भी कहना है कि उसने कभी भी राजनीतिक लाभ के लिए न्याय को बाधित नहीं किया।
जहां भी परीक्षाओं की शुचिता पर सवाल उठे, वहां कठिन लेकिन आवश्यक निर्णय लेते हुए परीक्षाएं रद्द की गईं, ताकि युवाओं के भविष्य से कोई समझौता न हो।
यह फैसला लाखों अभ्यर्थियों के लिए कष्टदायक जरूर था, लेकिन इसे पारदर्शिता और न्याय के लिए जरूरी कदम बताया गया।
✦ 2024–25 की परीक्षाएं अब संदेह के घेरे में
पिछले दो वर्षों में राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा अनेक बड़ी परीक्षाएं आयोजित की गईं, जिनमें शामिल हैं:
- सूचना सहायक
- संविदा नर्स (GNM / ANM)
- कृषि पर्यवेक्षक
- कनिष्ठ लेखाकार
- संगणक (Computer)
- CET (स्नातक व सीनियर सेकेंडरी)
- पशु परिचर
- कनिष्ठ अनुदेशक
- LDC
- कनिष्ठ अभियंता (JEN)
- पटवारी
- वाहन चालक
- ग्राम विकास अधिकारी (VDO)
- चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी (Grade-4)
इन सभी परीक्षाओं में 35 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने भाग लिया था।
✦ वही सिस्टम, वही स्टाफ – सबसे बड़ा सवाल
सबसे बड़ा और गंभीर सवाल यह है कि ये सभी परीक्षाएं उसी सिस्टम और उसी स्टाफ की देखरेख में संपन्न हुईं, जिन पर अब OMR शीट में गड़बड़ी के आरोप लगे हैं।
ऐसे में स्वाभाविक रूप से इन परीक्षाओं की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर संदेह उत्पन्न हो गया है।
✦ अभ्यर्थियों की बढ़ती शिकायतें
पिछले दो वर्षों से अभ्यर्थी लगातार यह शिकायत कर रहे हैं कि कई परीक्षाओं की कट-ऑफ असामान्य रूप से बहुत अधिक जा रही है।
कई मेधावी उम्मीदवारों के चयन से बाहर होने पर यह सवाल उठ रहा है कि कहीं OMR शीट में छेड़छाड़ या अंदरूनी सेटिंग तो इसका कारण नहीं है।
इन शंकाओं का समाधान होना अब बेहद आवश्यक हो गया है, ताकि युवाओं का भरोसा व्यवस्था पर बना रहे।
✦ मुख्यमंत्री से निष्पक्ष जांच की मांग
इस पूरे मामले को लेकर अब मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा से यह मांग की जा रही है कि:
- 2024 और 2025 की सभी भर्ती परीक्षाओं की स्वतंत्र, निष्पक्ष और गहन जांच करवाई जाए
- जांच केवल किसी एक राजनीतिक दल के कार्यकाल तक सीमित न रहे
- दोषी चाहे किसी भी शासनकाल या पद से जुड़ा हो, उसे कड़े कानून के तहत सजा दी जाए
- युवाओं और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो भर्ती प्रक्रिया से लोगों का विश्वास पूरी तरह टूट सकता है।
✦ भर्ती व्यवस्था को चुनौती
राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड में OMR शीट बदलने का मामला केवल एक घोटाला नहीं, बल्कि पूरी भर्ती व्यवस्था के लिए चेतावनी है।
यह समय राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से ऊपर उठकर न्याय, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का है।
राजस्थान का युवा वर्ग यही चाहता है कि चाहे कांग्रेस शासन हो या भाजपा शासन, बेईमानी करने वालों को किसी भी हाल में बख्शा न जाए और मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों को उनका हक मिले। यदि सरकार निष्पक्ष और व्यापक जांच कराती है, तो न केवल दोषियों को सजा मिलेगी, बल्कि लाखों युवाओं का टूटा भरोसा भी दोबारा बहाल हो सकेगा।

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