Sucess Story: सेना से खेत तक: प्राकृतिक खेती करने वाले बरवाली के सूबेदार तुलाराम गोदारा को दिल्ली से बुलावा

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बरवाली की सुबह उस दिन कुछ अलग थी। गांव की गलियों में चर्चा थी कि यहां के बेटे, सेवानिवृत्त सूबेदार तुलाराम गोदारा, इस बार गणतंत्र दिवस 2026 के समारोह में नई दिल्ली जाएंगे। यह सिर्फ एक यात्रा नहीं थी, बल्कि मेहनत, सोच और बदलाव की कहानी थी।up to date

सिग्नल कोर में वर्षों तक देश सेवा करने के बाद तुलाराम गोदारा ने जब वर्दी उतारी, तो हाथ में हल थाम लिया। उन्होंने तय किया कि खेती वही करेंगे जो धरती को नुकसान न पहुंचाए। रसायन और ज़हर से दूर रहकर उन्होंने प्राकृतिक खेती की राह चुनी। शुरुआत आसान नहीं थी, लेकिन विश्वास मजबूत था।

धीरे-धीरे उनकी मेहनत रंग लाने लगी। खेतों की मिट्टी फिर से जीवित होने लगी, फसलें स्वस्थ हुईं और लोग पूछने लगे—“यह कैसे किया?” इसी दौरान कृषि विभाग के अधिकारी और कर्मचारियों का मार्गदर्शन उन्हें मिलता रहा। नोहर कृषि अधिकारी राम प्रकाश गोदारा, सहायक कृषि अधिकारी सपना सोनी, सत्यनारायण गोदारा और कृषि पर्यवेक्षक विनोद कुमारी ने हर कदम पर उनका साथ दिया।up to date

तुलाराम गोदारा सिर्फ खेती तक ही सीमित नहीं रहे। दयाराम ढिल द्वारा चलाए जा रहे “जीवन एक गुलजार” अभियान में वे पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देने लगे। गांव के लोग उन्हें अब सिर्फ पूर्व सैनिक नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रहरी के रूप में देखने लगे।up to date

इसी समर्पण का परिणाम था कि भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने उन्हें गणतंत्र दिवस 2026 के राष्ट्रीय समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया। राजस्थान से चुने गए 10 किसानों में वे भी शामिल हैं। खास बात यह है कि इन किसानों और उनके दंपति के लिए यात्रा और ठहरने की पूरी व्यवस्था निःशुल्क की गई है।up to date

जब यह खबर बरवाली पहुंची, तो बधाइयों का तांता लग गया। गांव के लोगों की आंखों में गर्व था। एक सैनिक, जिसने सीमा पर देश की रक्षा की, अब खेतों में देश का भविष्य संवार रहा है।up to date

तुलाराम गोदारा की यह कहानी बताती है कि अगर नीयत साफ हो और मेहनत सच्ची, तो गांव की मिट्टी से उठी पहचान देश की राजधानी तक पहुंच सकती है।up to date

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