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सरसा । शहर में आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए नगर परिषद ने भले ही टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली हो, लेकिन अभी अभियान शुरू नहीं हो पाया है। वजह साफ है—पशुपालन विभाग से वेटनरी सर्जन (VS) और वेटनरी लाइवस्टॉक डेवलपमेंट असिस्टेंट (VLDA) की तैनाती अब तक नहीं हुई है। नियमानुसार वीएस और वीएलडी की मौजूदगी के बिना कुत्तों को पकड़ने, वैक्सीनेशन और नसबंदी की प्रक्रिया शुरू नहीं की जा सकती।up to date
सर्वोच्च न्यायालय द्वारा आवारा कुत्तों के मामलों में सख्ती के बाद नगर परिषद प्रशासन कोई जोखिम नहीं लेना चाहता। इसी कारण हर स्तर पर सतर्कता बरती जा रही है और नियमों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित किया जा रहा है।up to date
सख्त मॉनिटरिंग, हर कुत्ते की होगी टैगिंग
इस बार अभियान में एजेंसी को अतिरिक्त जिम्मेदारी निभानी होगी। कुत्तों की टैगिंग के साथ-साथ ऑपरेशन, वैक्सीनेशन से जुड़ी वीडियो रिकॉर्डिंग और फोटोग्राफी अनिवार्य की गई है। सबसे अहम नियम यह रहेगा कि हर कुत्ते को उसी गली या मोहल्ले में छोड़ा जाएगा, जहां से उसे पकड़ा गया है।
पूर्व में कुत्तों को उनके मूल स्थान पर नहीं छोड़ने को लेकर विवाद खड़ा हो चुका है। हालात ऐसे बने कि अधिकारियों को तीन दिन तक कुत्तों को ढूंढकर वापस लाना पड़ा। इसी अनुभव के चलते इस बार प्रशासन कोई चूक नहीं चाहता।
76 लाख की लागत, 5629 कुत्तों का वैक्सीनेशन
नगर परिषद ने सरकारी नियमों के तहत प्रति कुत्ता 1350 रुपये की दर से वैक्सीनेशन का टेंडर दिया है। इस हिसाब से करीब 76 लाख रुपये की लागत से 5629 आवारा कुत्तों को पकड़ा जाएगा और उनका वैक्सीनेशन किया जाएगा। हिंसक कुत्तों को अलग रखने की व्यवस्था भी की जाएगी।
सरकारी मानक के अनुसार जहां 40 लोग होते हैं, वहां औसतन एक आवारा कुत्ता पाया जाता है। इसी फार्मूले के आधार पर शहर में कुत्तों की संख्या का आकलन किया गया है।
कर्मचारियों के सर्वे में सामने आया 10 हजार का आंकड़ा
नगर परिषद के कर्मचारियों और दरोगाओं द्वारा किए गए वार्ड व कॉलोनी स्तर के सर्वे में शहर में करीब 10 हजार आवारा कुत्तों का अनुमान सामने आया था। इसी आधार पर टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई।
पूर्व टेंडर में शहर के भीतर 5800 कुत्ते दर्शाए गए थे, जिनमें से एजेंसी ने 3900 कुत्तों का वैक्सीनेशन किया। इसके बाद करीब 1900 मेल और फीमेल कुत्ते शेष रह गए थे। इस बार 5629 कुत्तों के आंकड़े के आधार पर नया टेंडर लगाया गया है।
हालांकि, नियमों के अनुसार छह माह से कम उम्र के कुत्तों की नसबंदी नहीं की जा सकती। ऐसे में इस बार भी 30 प्रतिशत से अधिक कुत्तों के छह माह से कम उम्र के होने की संभावना जताई जा रही है।up to date
प्रशासन का साफ संदेश—लापरवाही बर्दाश्त नहीं
नगर परिषद के मुख्य सफाई निरीक्षक जयवीर सिंह ने स्पष्ट किया कि एजेंसी को टेंडर दे दिया गया है, लेकिन पशुपालन विभाग की ओर से वीएस और वीएलडी की ड्यूटी लगाए बिना काम शुरू नहीं किया जाएगा।
उन्होंने कहा, “वही अधिकारी मॉनिटरिंग करेंगे और सभी व्यवस्थाओं की जांच करेंगे। आवारा कुत्तों को पकड़ने के काम में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरती जाएगी। इसलिए पूरी प्रक्रिया नियमानुसार ही पूरी की जा रही है।” शहरवासियों को अब पशुपालन विभाग से हरी झंडी मिलने का इंतजार है, ताकि आवारा कुत्तों की समस्या का समाधान सुरक्षित और नियमबद्ध तरीके से शुरू हो सके।up to date

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