Surajkund Craft Mela 2026 Begins: 50 देशों की भागीदारी के साथ शुरू हुआ सूरजकुंड शिल्प मेला, संस्कृति और शिल्प का उत्सव

 

 मुख्यमंत्री  ने सूरजकुंड आगमन पर उपराष्ट्रपति का स्वागत किया up to date

‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना के साथ भारतीय शिल्प और संस्कृति का वैश्विक उत्सव

फरीदाबाद।
हरियाणा के ऐतिहासिक और विश्वविख्यात सूरजकुंड में आज 39वें Surajkumd International Silp Mela सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेला–2026 का भव्य शुभारंभ हुआ। यह बहुप्रतीक्षित मेला 15 फरवरी 2026 तक चलेगा, जिसमें देश-विदेश से आए कारीगर, कलाकार और सांस्कृतिक दल अपनी कला, परंपरा और विरासत का प्रदर्शन करेंगे। भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन C.P. Radhakrishan ने बतौर मुख्य अतिथि इस भव्य आयोजन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी Mukhyamantri Nayab Singh Saini ने सूरजकुंड आगमन पर उपराष्ट्रपति का आत्मीय स्वागत किया।

सूरजकुंड शिल्प मेला केवल एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना, पारंपरिक हस्तशिल्प, लोक कलाओं और वैश्विक सांस्कृतिक संवाद का जीवंत मंच है। लगभग चार दशकों से यह मेला भारतीय शिल्पकारों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। up to date


गरिमामयी उपस्थिति से सजा उद्घाटन समारोह

उद्घाटन समारोह में केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर, सहयोगी देश मिस्र के राजदूत कमल जायद ग़लाल, हरियाणा के राजस्व एवं शहरी स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति राज्य मंत्री राजेश नागर, खेल, युवा अधिकारिता एवं उद्यमिता मंत्री गौरव गौतम, भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय के सचिव डॉ. श्रीवत्स कृष्णा, हरियाणा पर्यटन विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित अग्रवाल सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी, विधायक और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। up to date

इसके अलावा बड़ी संख्या में देश-विदेश से आए शिल्पकार, कलाकार, सांस्कृतिक दल और हजारों की संख्या में दर्शक इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने।

सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेला–2026 का भव्य शुभारंभ 



पारंपरिक अंदाज में हुआ उपराष्ट्रपति का स्वागत

मेले के शुभारंभ अवसर पर उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने मेला परिसर में स्थित हरियाणा के अपना घर पवेलियन का दौरा किया। यहां उन्हें हरियाणवी पगड़ी पहनाकर पारंपरिक तरीके से सम्मानित किया गया। इसके बाद उपराष्ट्रपति ने इस वर्ष के थीम स्टेट मेघालय Theam State Meghalya के स्टॉलों का अवलोकन किया और शिल्पकारों से सीधा संवाद कर उनकी कलात्मक प्रतिभा की सराहना की।

उन्होंने विभिन्न भारतीय राज्यों और विदेशी देशों के सांस्कृतिक स्टॉलों का भी भ्रमण किया, जहां लोक नृत्य, संगीत, हस्तशिल्प और पारंपरिक कलाओं की विविध झलक देखने को मिली। कलाकारों और शिल्पकारों से बातचीत कर उपराष्ट्रपति ने उनका उत्साह बढ़ाया। up to date


दीप प्रज्ज्वलन और ‘मेला साथी ऐप’ का शुभारंभ

मेला परिसर की मुख्य चौपाल के मंच पर उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर आगंतुकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए ‘मेला साथी ऐप’ Mela Sarthi App का शुभारंभ भी किया गया, जिससे मेले से जुड़ी सभी जानकारियां, स्टॉल लोकेशन, कार्यक्रम और सुविधाएं डिजिटल रूप से उपलब्ध होंगी।

हरियाणा सरकार की ओर से मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और विरासत एवं पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने उपराष्ट्रपति को पांचजन्य शंख और महाभारत के दृश्य को दर्शाती आकर्षक पेंटिंग भेंट कर सम्मानित किया।


‘वसुधैव कुटुंबकम’ का जीवंत स्वरूप है सूरजकुंड मेला : उपराष्ट्रपति

उद्घाटन के बाद अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला दशकों से भारत की सांस्कृतिक आत्मा, कलात्मक उत्कृष्टता और सभ्यतागत निरंतरता का प्रतीक रहा है। यह आयोजन ‘वसुधैव कुटुंबकम’ Vashudhev Kutumbhkam के शाश्वत भारतीय दर्शन को साकार करता है, जिसमें पूरी दुनिया को एक परिवार माना गया है। up to date

उन्होंने कहा कि यह मेला उन हाथों का सम्मान करता है, जो सृजन करते हैं, उन मस्तिष्कों का उत्सव है, जो नवाचार करते हैं, और उन परंपराओं को जीवित रखता है, जो हमारी पहचान का आधार हैं। पिछले लगभग चार दशकों से यह मेला कारीगरों, बुनकरों, मूर्तिकारों, चित्रकारों और लोक कलाकारों को वैश्विक मंच प्रदान कर रहा है।


आत्मनिर्भर भारत की दिशा में सशक्त कदम

उपराष्ट्रपति ने कहा कि इस वर्ष मेले का आत्मनिर्भर भारत Aatamnirbhar bharat पर केंद्रित दृष्टिकोण इसके महत्व को और गहरा बनाता है। हमारे कारीगर सदियों पुराने ज्ञान और कौशल के संरक्षक हैं और उन्हें सशक्त बनाना एक समावेशी, टिकाऊ और मजबूत अर्थव्यवस्था की नींव है।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना Pradhanmantri Vishavkarma Yojana जैसी पहल ने कारीगर समुदाय को कौशल विकास, वित्तीय सहायता और बाजार से जोड़कर नई ऊर्जा दी है। इससे पारंपरिक हस्तशिल्प को न केवल संरक्षण मिला है, बल्कि रोजगार और आय के नए अवसर भी सृजित हुए हैं। up to date


उत्तर प्रदेश, मेघालय और मिस्र की विशेष सहभागिता

उपराष्ट्रपति ने इस वर्ष के भागीदार राज्य उत्तर प्रदेश और मेघालय Uttar Pardesh & Meghalya का उल्लेख करते हुए कहा कि ये राज्य ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को सशक्त रूप से अभिव्यक्त करते हैं। उत्तर प्रदेश की गंगा-जमुनी तहजीब और मेघालय की अनूठी जनजातीय व मातृसत्तात्मक संस्कृति मेले की विविधता को और समृद्ध बना रही है।

सहयोगी देश मिस्र का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि मिस्र और भारत दोनों प्राचीन सभ्यताओं के वाहक हैं। ऐसी सांस्कृतिक साझेदारियां देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने के साथ-साथ लोगों के बीच आपसी समझ और सौहार्द को भी बढ़ाती हैं।


सूरजकुंड मेला हाथ से बनी वस्तुओं और प्रामाणिक शिल्प के महत्व up to date

सांस्कृतिक के साथ आर्थिक सफलता का प्रतीक

उपराष्ट्रपति ने कहा कि बड़े पैमाने पर उत्पादन के इस युग में सूरजकुंड मेला हाथ से बनी वस्तुओं, मानवीय स्पर्श और प्रामाणिक शिल्प के महत्व को रेखांकित करता है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष करीब 15 लाख पर्यटकों ने मेले का भ्रमण किया था और कारीगरों के उत्पादों की बिक्री में लगातार वृद्धि हो रही है। up to date

उन्होंने कहा कि यह मेला सांस्कृतिक ही नहीं, बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी अत्यंत सफल आयोजन है, जो सीधे तौर पर शिल्पकारों की आजीविका से जुड़ा हुआ है।


प्राचीनता और आधुनिकता का संगम : मुख्यमंत्री नायब सैनी

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अपने संबोधन में कहा कि सूरजकुंड शिल्प मेला भारत की प्राचीन विरासत और आधुनिक सोच का सजीव संगम है। पिछले 38 वर्षों से यह मेला लोक कला, संस्कृति और शिल्प परंपराओं को संरक्षित करते हुए उन्हें नई पीढ़ी और वैश्विक मंच से जोड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि इस वर्ष की थीम ‘लोकल टू ग्लोबल’ Local To  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के विज़न को साकार करती है। आत्मनिर्भरता केवल आर्थिक स्वावलंबन नहीं, बल्कि अपनी संस्कृति और पहचान पर गर्व करने की भावना भी है।


सहयोग और समागम से समृद्ध होती हैं सभ्यताएं

मुख्यमंत्री ने कहा कि सभ्यताएं सहयोग और सांस्कृतिक समागम से ही समृद्ध होती हैं। इस बार सहयोगी देश मिस्र और भागीदार राज्य उत्तर प्रदेश व मेघालय की सहभागिता ने मेले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक समृद्ध बनाया है। यह सांस्कृतिक सहभागिता राज्यों और देशों के बीच दूरी मिटाकर आपसी सौहार्द को मजबूत करती है।


 इस वर्ष 50 से अधिक देशों के लगभग 700 प्रतिनिधि मेले में शामिल up to date

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ता विश्वास : डॉ. अरविंद शर्मा

हरियाणा के विरासत एवं पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा कि सूरजकुंड शिल्प मेले के प्रति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विश्वास लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि जहां पिछले वर्ष 44 देशों ने भाग लिया था, वहीं इस वर्ष 50 से अधिक देशों के लगभग 700 प्रतिनिधि मेले में शामिल हो रहे हैं। up to date

उन्होंने सुरक्षा, परिवहन और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर कहा कि सभी इंतजाम पूरी तरह चाक-चौबंद किए गए हैं और दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन को भी आयोजन का को-पार्टनर बनाया गया है।

डॉ. शर्मा ने हरियाणा की ऐतिहासिक धरोहर राखीगढ़ी का उल्लेख करते हुए कहा कि यह लगभग 7000 वर्ष पुरानी सभ्यता है, जो भारत की गौरवशाली विरासत का प्रतीक है। राज्य सरकार इसे वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। up to date


‘लोकल-ग्लोबल

39वां सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेला भारतीय संस्कृति, लोक कलाओं और हस्तशिल्प परंपराओं का भव्य उत्सव है। यह मेला ‘लोकल को ग्लोबल’ बनाकर आत्मनिर्भर भारत की सोच को मजबूत करता है। आने वाले दिनों में यह आयोजन न केवल लाखों पर्यटकों को आकर्षित करेगा, बल्कि भारतीय शिल्पकारों और कलाकारों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में भी अहम भूमिका निभाएगा।

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