Agro Strawberry Farming : परम्परागत खेती को छोड़कर इस खेती को अपनाकर मालामाल हो रहे यहां के किसान

10 वर्षों से स्ट्रॉबेरी की खेती करके माला माल हो रहे हैं। up to date

पूना से पौध लाकर, दिल्ली मंडी में बेचते हैं, 2-3 लाख तक प्रति एकड़ फायदा 

 भिवानी। दिनों दिन नई-नई तकनीकें आ रही है जो कि खेती के कार्यों को आसान तो बना ही रही है साथ ही में उन्हें अपनाकर कम लागत में अधिक कमाई की जा सकती है। ऐसे ही एक तरफ किसान परम्परागत खेती करके नुकसान उठा रहे हैं, वहीं आज की तकनीकों का इस्तेमाल करते हुए किसान सब्जी, बागवानी व औषधीय खेती करके लाखोें रुपये का मुनाफा कमा रहे हैं। up to date

इसी कड़ी में हम आपको मिलाते हैं अन्न का कटोरा कहे जाने वाले राज्य हरियाणा के जिला भिवानी के गांव बीरण निवासी किसान मनफूल सैनी से मनफूल पिछले लगभग 10 वर्षों से स्ट्रॉबेरी की खेती करके माला माल हो रहे हैं। किसान ने बताया कि वह गांव बापोड़ा में स्ट्रॉबेरी के खेती करते हैं। उन्होंने बताया कि वे पिछले करीब 10 साल से स्ट्रॉबेरी की खेती कर रहे हैं। वही इस बार 13 एकड़ में स्ट्रॉबेरी लगाई हुई है। उन्होंने खर्चे की बात करते हुए बताया कि एक एकड़ में लगभग 5 लाख के करीब खर्चा आता है। अगर फ्रूट अच्छा हो और मंडी में भाव मिले तो प्रति एकड़ ढाई से तीन लाख रुपए की बचत हो जाती है। उन्होंने बताया कि स्ट्रॉबेरी की बिजाई सितंबर माह में की जाती है।  up to date



गांव बापोड़ा में स्ट्रॉबेरी के खेती करते हैं।   up to date

 13 एकड़ में बेच चुके 80 लाख रुपये की पैदा 

किसान मनफुल ने बताया कि हरियाणा में इसकी पौध नहीं होने के कारण हजारों किलोमीटर दूर जाकर महाराष्ट्र के पूना से स्ट्रॉबेरी के लेकर आते हैं। स्ट्रॉबेरी में ताजा पानी की आवश्यकता होती है। जिसका टीडीएस कम से कम 250 होना चाहिए और जमीन उपजाऊ हो। इसके अलावा रेतीले एरिया में भी हो सकती है। शुरूआत में खेत की अच्छे से जुताई करनी चाहिए। देशी खाद डालकर खेत तैयार किया जाता है और फिर पौधों की रोपाई की जाती है। किसानों ने बताया कि 13 एकड़ में बिजाई की गई स्ट्रॉबेरी में से करीब 80 लाख की स्ट्रॉबेरी बेची जा चुकी है। खेत में बिजाई की गई स्ट्रॉबेरी को खुद ही पैक करते हैं। up to date

 किसान बताते हैं कि यह काम हमारा परिवार व लेबर से स्ट्रॉबेरी को पैक करता है। Bhiwani Farmers Earn Crores With Strawberry Farming | Delhi Mandi तुड़ाई करके गाड़ी में दिल्ली लेकर जाते हैं और दिल्ली की आजादपुर मंडी में बेचते हैं। उन्होंने जिक्र करते हुए बताया कि इस खेती में फंगस की अधिक समस्या होती है। हालांकि सरकार की तरफ से सब्सीडी भी दी जाती है। अगर कोई किसान स्ट्रॉबेरी की खेती करना चाहे तो शुरूआत में थोड़ी जमीन पर खेती कर सकते हैं। अगर वे खुद 13 एकड़ की बात करते तो वे पट्टे पर लेकर स्ट्रॉबेरी की खेती करते हैं। वहीं इन 13 एकड़ में करीब 25-30 लाख रुपए की बचत होगी। up to date

करीब 27 सालों से कर रहे हैं स्ट्रॉबेरी की खेती: धर्मवीर

 वहीं भिवानी के ही गांव दिनोद के किसान धर्मवीर भी स्ट्रॉबेरी की खेती करते हैं। उन्होंने बताया कि वे पिछले करीब 27 साल से स्ट्रॉबेरी की खेती करते आ रहे हैैं। इस बार उन्होंने 8 एकड़ में स्ट्रॉबेरी की बिजाई की है। स्ट्रॉबेरी की फसल अच्छे से चल रही थी, लेकिन कुछ दिन पहले ओलावृष्टि होने से काफी नुकसान हुआ है। ओलावृष्टि से लगभग 50 प्रतिशत तक नुकसान हुआ है। ओलावृष्टि से पहले बहुत अच्छे से फूल चल रहा था और मजदूर भी काम लगे थे। किसान धर्मबीर ने कहा कि एक एकड़ पर करीब 10 लाख रुपए खर्च हो जाता है, शुरूआत से लेकर आखिर तक।  up to date


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इस बार ओलावृष्टि के कारण किसान ना लाभ-ना हानि की स्थिति लग रही है। क्योंकि काफी नुकसान हुआ है। अगर अच्छे से स्ट्रॉबेरी की फसल पूरी हो तो प्रति एकड़ 2-3 लाख रुपए की बचत होती है। लेकिन इस बार ओलावृष्टि के कारण नुकसान हुआ है। वे स्ट्रॉबेरी की पौध महाराष्ट्र के पूना से लेकर आते हैं।  up to date

 अच्छी फसल हो तो 8-10 हजार ट्रे पैदा हो जाती है एक एकड़ में 


इसमें ड्रिप सिस्टम से सिंचाई की जाती है। up to date


 एक एकड़ में अच्छी फसल हो तो 8-10 हजार ट्रे पैदा हो जाती है। इस बार आसपास के करीब 60 एकड़ में स्ट्रॉबेरी की बिजाई की हुई है। इसमें फंगस की आशंका रहती है। जिसकी स्प्रे करनी पड़ती है और खाद डालनी पड़ती है। बच्चे के तरह पालना पड़ता है। इसमें ड्रिप सिस्टम से सिंचाई की जाती है। किसान धर्मबीर ने बताया कि पट्टे पर लेकर स्ट्रॉबेरी बिजाई की गई है। अगर घर की जमीन हो तो सरकर सब्सिडी देती है। हर साल सब्सिडी देनी चाहिए। सरकार द्वारा विशेषज्ञों व चिकित्सकों की भी सहायता नहीं मिलती। खुद के दम पर सभी व्यवस्थाएं करनी पड़ती हैं। ओलावृष्टि से हुए नुकसान का कोई मुआवजा नहीं दिया गया है। सरकार को नुकसान की भरपाई के लिए 2 लाख प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवजा देना चाहिए। up to date

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