
जमालपुर में बने शहीद स्मारक वीर सैनिकों के बलिदान की मूक गवाही
बवानीखेड़ा। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान सिंगापुर में पांचवीं लाइट पलटन में शामिल करीब 214 भारतीय सैनिकों ने सिंगापुर में विद्रोह कर अंग्रेज अफसरों को मौत के घाट उतारा था। विद्रोह में शामिल अधिकतर यहां के बहादुर सैनिक थे। अंग्रेजों ने विद्रोह को दबाने के लिए 15 फरवरी 1915 को सरे सरे आम 41 सैनिकों सिंगापुर की छावनी में सरेआम गोली मार दी थी बाकियों को कोर्ट मार्शल के तहत अलग-अलग सजा सुनाई थी। शहादत के एक सौ ग्यारह साल बाद भी यहां जमालपुर में बने शहीद स्मारक वीर सैनिकों के बलिदान की मूक गवाही दे रहा है वहीं क्षेत्र के लोग आज भी गर्व अनुभव अनुभव कर रहे हैं। ऐतिहासिक जानकारी के अनुसार प्रथम विश्व युद्ध के दौरान अंग्रेजों की सेना में लड़ रहे भारतीय सैनिकों में देश की आजादी को लेकर भारी रोष व्याप्त था, क्योंकि 1857 की क्रांति में भी जमालपुर रोहनात, सीपर ,बलियाली, पुट्टी मंगल खां के हजारों लोगों ने शहादत दी थी। 1857 की घटना की विफलता की चिंगारी भी सैनिकों के दिल में थी दूसरे गदर पार्टी के आह्वान पर अमेरिका के सेंस फ्रांसिस्को शहर में अंग्रेजों से सैनिकों ने विद्रोह की योजना बनाई थी अ ंग्रेजी सेना के पांचवीं लाईट पलटन के हजारों भरतीय सैनिक अमेरिका के सेंस फ्रांसिस्को शहर से कामा गाटा मारन जहाज पर सवार होकर कोलकाता की दमदम बंदरगाह पर आ रहे थे। जहां पर उनकी आगामी योजना को क्रियान्वित किया जाना था। अंग्रेजों को भारतीय सेना की योजना की मुखबिर द्वारा सूचना प्राप्त हो गई। सीआईडी लीक होने की बात भारतीय सैनिकों में भी पहुंच गई तो कुछ सैनिक बीच रास्ते में ही सिंगापुर में उतर गए। और सिंगापुर में मौजूद भारतीय सैनिकों से मिल विद्रोह का बिगुल फूंक दिया। सिंगापुर की छावनी में भारतीय सैनिकों ने सैकड़ों अंग्रेज सैनिकों व अधिकारियों को मौत के घाट उतार दिया।
41 लोगों को मारी सरेआम गोली
सिंगापुर की छावनी में सैनिक विद्रोह में शामिल भारतीय सैनिक को मैं अधिकतर तत्काल पंजाब (हरियाणा) के थे करीब। 214 सैनिकों ने विद्रोह किया था। इस विद्रोह को दबाने के लिए अंग्रेजों ने 41 लोगों को पकडक़र सिंगापुर की 9 फीट ऊंची दीवार के सामने 15 फरवरी 2015 को गोली से उड़ा दिया तथा शेष को कोर्ट मार्शल के तहत अलग अलग सजा सुनाई थी। पकड़े गए लोगों को गोली मारने से पहले अंग्रेजों ने दीवार की तरफ मुहं फेर बात कही ताकि उनकी पीठ पर गोली मारी जा सके, परंतु बहादुर भारतीय सैनिकों ने दीवार की तरह मुहं करने से मना कर दिया और शत्रु के सामने छाती तान दी और कहा गोल मारनी है तो सीने में मारो, हम दीवार की तरफ मुहं नहीं करेंगे। छाती पर गोली खाकर भारतीय सैनिकों ने शहादत दी थी। शहादत देने वालों में तत्कालीन हिसार जिले के गांव बलियाली, जमालपुर, गुजरानी, चांग, किरावड़, गुजरानी, चौधरीवास, भूरटाना, पाटन, लितानी, ढाणी गुजरान के 18 सैनिक शामिल थे।इन्होंने दी शहादत
शहादत देने वालों में गांव भुरटाना के अहमद खान जमालपुर के इब्राहिम, मुंशी खान, मुराद अली खान ,मोहम्मद बक्श, रसूकअली, गांव किरावड से चिश्ती खान, बलियाली से सैयद मोहम्मद, बशारत अली ,सुलेमान खान, गांव चांग से फजल अली ,गांव गुजरानी से लाल खान, गांव पाटन से गफ्फर अली खान, गांव लितानी से नवाब खान ,गांव ढाणी गुजरात से बकर अली, गांव छान से रहीमदाद, चौधरी वास् से सम्मद खान शामिल है।इन्हें मिली कारावास की सजा
इसके बाद बाकी सैनिकों को पकड़ कर अंग्रेजों ने कोर्ट मार्शल ला के तहत सैनिकों को अलग-अलग सजा सुनाई जिसमें 63 सैनिकों को आजीवन जेल,47 सैनिकों को 20 साल की जेल, 34 सैनिकों को20 साल काला पानी की सजा,10 सैनिकों को काला पानी की सजा, 3 सैनिको को बा मशक्कत सजा (5 साल की कठोर जेल), 2 सैनिकों को 3 साल की बा मशक्कत सजा,9 सैनिकों को 2 साल की बा मशक्कत सजा। 2सैनिक लापता रहे।शहीदों की याद में बना है स्मारक
Gaon Jamalpur गांव जमालपुर के पशु अस्पताल में प्रथम विश्व युद्ध के दौरान सिंगापुर में शहादत देने वाले शहीदों की याद में एक स्मारक बनाया गया है। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान सिंगापुर में पांचवीं लाइट पलटन में शामिल करीब 214 भारतीय सैनिकों ने सिंगापुर में विद्रोह कर अंग्रेज अफसरों में अधिकारियों को मौत के घाट उतारा था। अंग्रेजों ने विद्रोह को दबाने के लिए 15 फरवरी 1915 को 41 सैनिकों को सिंगापुर की छावनी में सरेआम गोली मार दी थी तथा शेष को कोर्ट के मार्शल के तहत अलग-अलग सजा सुनाई थी।ये अधिकतर अधिकतर सैनिक वर्तमान हरियाणा से सम्बंधित थे।![]() |
| सिंगापुर में शहादत देने वाले शहीदों की याद में एक स्मारक up to date |
फोटो कैप्शन : 14बीडब्ल्यूएन, 13 : गांव जमालपुर के पशु अस्पताल में बना शहीदों की याद में स्मारक।
फोटो कैप्शन : 14बीडब्ल्यूएन, 14 : सिंगापुर में दीवार के सामने छाती पर गोली खाते हुए भारतीय सैनिक।
फोटो कैप्शन : 14बीडब्ल्यूएन, 15 : कर्मबीर खान सामाजिक कार्यकर्ता।
फोटो कैप्शन : 14बीडब्ल्यूएन, 16 : डा. महेंद्र सिंह इतिहासविद।

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