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| 39वां अंतर्राष्ट्रीय सूरजकुंड शिल्प मेला up to date |
चंडीगढ़। हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी के मार्गदर्शन एवं पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा की देखरेख में फरीदाबाद के सूरजकुंड में आयोजित 39वां अंतर्राष्ट्रीय सूरजकुंड शिल्प मेला इस बार भी कला, संस्कृति और आत्मनिर्भर भारत की भावना को मजबूती से प्रस्तुत कर रहा है। “लोकल फॉर ग्लोबल – आत्मनिर्भर भारत” की थीम पर आधारित यह मेला न केवल हरियाणा, बल्कि देश के कोने-कोने से आए हस्तशिल्प कलाकारों को अपनी कला प्रदर्शित करने का बेहतरीन मंच दे रहा है। up to date
मेले में तिरुपति बालाजी से आए प्रसिद्ध वुड कार्विंग कलाकार फूला चंदू की स्टॉल पर्यटकों के बीच खास आकर्षण बनी हुई है। लकड़ी पर की गई बारीक नक्काशी और भगवान की सुंदर मूर्तियां लोगों को मंत्रमुग्ध कर रही हैं। फूला चंदू वर्षों से लकड़ी पर नक्काशी कर रहे हैं और अपनी कला के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वोकल फॉर लोकल और आत्मनिर्भर भारत विजन को साकार कर रहे हैं। उनकी स्टॉल न केवल कला प्रेमियों, बल्कि श्रद्धालुओं के लिए भी आस्था का केंद्र बनी हुई है। up to date
सूरजकुंड मेले में हस्तनिर्मित जूट उत्पादों की एक विशेष स्टॉल भी पर्यटकों को खूब लुभा रही है। यहां जूट बैग, बास्केट, स्टूल, होम डेकोर आइटम सहित 200 से अधिक स्वदेशी उत्पाद प्रदर्शित किए गए हैं। स्टॉल संचालक विशाल सिंह और सम्राट सिंह ने बताया कि सभी उत्पाद पूरी तरह हाथ से बने और पर्यावरण के अनुकूल हैं। पारंपरिक डिज़ाइन के साथ आधुनिक जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किए गए ये उत्पाद लोगों की पहली पसंद बनते जा रहे हैं। up to date
मेले में स्वच्छता और साफ-सफाई पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। उपायुक्त आयुष सिन्हा के निर्देशानुसार जिला प्रशासन और हरियाणा पर्यटन विभाग द्वारा पूरे मेला परिसर में नियमित सफाई कराई जा रही है। प्रवेश द्वारों, मुख्य मार्गों और स्टॉल क्षेत्रों में सफाई कर्मचारियों की विशेष टीमें तैनात हैं। जगह-जगह डस्टबिन लगाए गए हैं और कारीगरों को पर्यावरण-अनुकूल सामग्री के उपयोग के लिए प्रेरित किया जा रहा है। स्वच्छ भारत मिशन से जुड़े संदेशों के माध्यम से पर्यटकों को भी जागरूक किया जा रहा है। up to date
आध्यात्मिक दृष्टि से भी सूरजकुंड मेला इस बार खास बना हुआ है। यहां श्रीमद्भगवद्गीता पर आधारित पंचजन्य शंख और सुदर्शन चक्र को कलाकृतियों के रूप में प्रदर्शित किया गया है, जो पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बने हुए हैं। भगवान श्रीकृष्ण और भगवान विष्णु से जुड़े इन पवित्र प्रतीकों के साथ लोग बड़ी संख्या में सेल्फी लेते नजर आ रहे हैं। इन कलाकृतियों में गीता के उपदेशों को प्रतीकात्मक रूप से प्रस्तुत किया गया है, जो आध्यात्मिक संदेश के साथ भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को भी दर्शाता है। up to date
इसके अलावा, मुंबई की प्रसिद्ध एलिफेंटा गुफा की त्रिमूर्ति ने भी सूरजकुंड मेले की up to date शोभा बढ़ा दी है। भगवान शिव के विभिन्न रूपों को दर्शाती यह त्रिमूर्ति दूर से ही पर्यटकों का ध्यान आकर्षित कर रही है। दक्षिण भारतीय मूर्तिकला से प्रेरित इस कलाकृति की नायाब सुंदरता हर आने-जाने वाले को अपनी ओर खींच रही है।
कुल मिलाकर, अंतर्राष्ट्रीय सूरजकुंड शिल्प मेला कला, संस्कृति, आध्यात्म और स्वदेशी उत्पादों का ऐसा संगम बन चुका है, जहां हर स्टॉल भारतीय विरासत की एक नई कहानी कहता नजर आता है। up to date

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