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| बेटी को घोड़ी पर बैठाकर शाही अंदाज में बनौरी निकाली up to date |
चोपटा। सिरसा जिले के गांव जमाल में एक विवाह समारोह उस समय खास बन गया, जब परंपराओं को नई सोच के साथ निभाते हुए बेटी को वही सम्मान दिया गया, जो आमतौर पर बेटे को मिलता है। गांव जमाल में लक्ष्मी की शादी से पहले आयोजित बनौरी (बिनोरा) कार्यक्रम में बेटी को घोड़ी पर बैठाकर शाही अंदाज में बनौरी निकाली गई। इस अनोखी पहल ने न केवल गांव बल्कि आसपास के क्षेत्र में भी बेटा–बेटी समानता का मजबूत संदेश दिया। up to date
परंपरागत रूप से बनौरी की रस्म दूल्हे के लिए निभाई जाती है, लेकिन इस बार लक्ष्मी के परिवार ने इस परंपरा को एक नई दिशा दी। जमाल गौशाला के पूर्व प्रधान राम प्रताप माहेश्वरी की पहल पर यह कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें उनकी पोती लक्ष्मी को घोड़ी पर बैठाकर पूरे गांव में बनौरी निकाली गई। डीजे की धुनों पर परिवार और रिश्तेदार नाचते-गाते नजर आए और पूरे माहौल में उत्साह और खुशी देखने को मिली। up to date
लक्ष्मी, मालचंद बिहानी महेश्वरी की बेटी हैं और उनकी शादी 4 फरवरी को ऐलनाबाद निवासी कैलाशचंद मालानी के बेटे मोहित के साथ तय हुई है। शादी से पहले इस रस्म को इस तरह निभाने का उद्देश्य साफ था—यह दिखाना कि बेटियां भी सम्मान, परंपरा और अधिकार में बेटों के बराबर हैं। घोड़ी पर सवार लक्ष्मी का आत्मविश्वास और चेहरे की मुस्कान इस बात का प्रमाण थी कि यह पल उनके लिए कितना खास था। up to date
इस अवसर पर लक्ष्मी के पिता मालचंद बिहानी महेश्वरी ने कहा कि उन्होंने यह कदम समाज में सकारात्मक संदेश देने के लिए उठाया है। उन्होंने कहा, “हमारी बेटी हमारे लिए बेटे से कम नहीं है। हमने हमेशा उसे समान अधिकार, सम्मान और प्यार दिया है। आज के समय में समाज को यह समझने की जरूरत है कि बेटियां भी हर क्षेत्र में आगे हैं और उन्हें बराबरी का दर्जा मिलना चाहिए।” up to date
लक्ष्मी ने भी भावुक होते हुए कहा कि उनके माता-पिता ने हमेशा उन्हें बेटे की तरह सहेजा और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा, “मुझे गर्व है कि मेरे परिवार ने मुझे यह सम्मान दिया। यह सिर्फ मेरी नहीं, बल्कि हर बेटी की जीत है।” up to date
कार्यक्रम में मौजूद समाजसेवी ओम प्रकाश डूडी, कुलदीप जैन, वेदप्रकाश कसवां, विजय जैन और धर्मपाल ने इस पहल की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि आज की बेटियां किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। शिक्षा और जागरूकता के कारण समाज की सोच में बड़ा बदलाव आ रहा है। पहले जहां बेटियों को बोझ समझा जाता था, वहीं अब लोग उन्हें गर्व के रूप में देखने लगे हैं। up to date
गांव जमाल में हुई यह अनोखी बनौरी न केवल एक पारिवारिक कार्यक्रम रही, बल्कि समाज को सोचने पर मजबूर करने वाला संदेश भी बन गई। यह आयोजन बताता है कि अगर परंपराओं को सकारात्मक सोच के साथ निभाया जाए, तो वे समाज में बड़ा बदलाव ला सकती हैं। up to date

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