मेहनत, ईमानदारी और दूरदर्शी सोच के थे स्वर्गीय ओमप्रकाश गोयल
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| स्वर्गीय ओमप्रकाश गोयल की स्मृति में डाक टिकट जारी करते हुए up to date |
भादरा/अप टू डेट न्यूज। भादरा क्षेत्र के गांव छानीबड़ी के लिए एक ऐतिहासिक और गर्व का अवसर सामने आया है। गांव के मूल निवासी स्वर्गीय ओमप्रकाश गोयल की पुण्यस्मृति में नेपाल सरकार ने 10 रुपये का डाक टिकट जारी है। नेपाल सरकार का यह कदम उठाया जाना न केवल अंतरराष्ट्रीय सम्मान है, बल्कि यह पूरे छानीबड़ी गांव, भादरा क्षेत्र और देश के लिए भी गौरव की बात है। स्वर्गीय ओमप्रकाश गोयल का जन्म छानीबड़ी गांव की पावन धरा पर हुआ था। उन्होंने अपने जीवन की शुरूआत एक सामान्य ग्रामीण परिवेश में की, लेकिन अपनी मेहनत, ईमानदारी और दूरदर्शी सोच के बल पर उन्होंने समाज में विशिष्ट पहचान बनाई। गांव की मिट्टी से जुड़ाव उनके जीवन की सबसे बड़ी विशेषता रही। चाहे वे देश-विदेश में रहे हों, लेकिन उनका मन और आत्मा हमेशा छानीबड़ी से जुड़ी रही। गांव के बुजुर्गों ने बताया कि ओमप्रकाश गोयल बचपन से ही संस्कारवान, सरल स्वभाव और परोपकारी प्रवृत्ति के व्यक्ति थे। उन्होंने अपने जीवन में जो भी उपलब्धियां हासिल कीं, उसका श्रेय हमेशा अपनी जन्मभूमि और माता-पिता के संस्कारों को दिया। उनके देहावसान के पश्चात भी गोयल परिवार का छानीबड़ी गांव से रिश्ता कमजोर नहीं पड़ा। आज भी उनका पूरा परिवार गांव से गहराई से जुड़ा हुआ है। समय-समय पर परिवार के सदस्य गांव में आते हैं, सामाजिक कार्यक्रमों में भाग लेते हैं और गांव की परंपराओं तथा संस्कारों को जीवित रखने में अपनी भूमिका निभाते हैं। गांव के लोग भी परिवार को सम्मान और अपनत्व की भावना से देखते हैं।
क्षेत्र के लिए गौरव का क्षण
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| नेपाल सरकार द्वारा स्व. ओमप्रकाश की स्मृति में जारी किया डाक टिकट |
नेपाल सरकार का यह कदम सराहनीय: जन प्रतिनिधि
गांव के सरपंच और अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी नेपाल सरकार के इस कदम का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि स्वर्गीय ओमप्रकाश गोयल जी जैसे व्यक्तित्व गांव की धरोहर होते हैं। उनकी स्मृति में जारी किया गया डाक टिकट आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देता रहेगा और उन्हें अपने गांव, समाज और देश के लिए कुछ करने का संदेश देगा। यह घटना साबित करती है कि व्यक्ति की असली पहचान उसके कर्मों से होती है, न कि केवल उसके पद या धन से। स्वर्गीय ओमप्रकाश गोयल जी का जीवन सादगी, सेवा और अपने मूल्यों से जुड़े रहने का उदाहरण रहा है। आज जब उनकी स्मृति में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला है, तो यह पूरे छानीबड़ी गांव के लिए गौरव, सम्मान और प्रेरणा का विषय है।


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