माता-पिता की शिक्षा के अभाव में बच्चे हाथ में कलम लेने की उम्र में भीख के लिए उठा रहे कटोरे
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| बच्चे को स्कूल में लेकर पहुंचे समाजसेवी रघुवीर कड़वासरा। |
नाथूसरी चौपटा। nathusari chopta आज कल भागदौड़ और स्वार्थ से भरी जिंदगी में लोगों को अपने काम से ही फुर्सत नहीं है तो लोग किसी के दुख को अपना समझना तो दूर सुनने का भी समय देते हैैं। अब देखें तो किसी के हाथ में मोबाइल होता है तो किसी के सिर पर काम का बोझ, किसी के मन में चिंता, किसी के चेहरे पर नकली मुस्कान दिखाई देती है। वहीं हमारे आसपास समाज में कुछ लोग ऐसे भी हैं जो दूसरों की समस्याओं को अपना समझकर उनका सहयोग करने का भी दम रखते हैं।
ऐसा ही एक वाकया बुधवार को देखने को उस वक्त मिला जब एक 12 वर्षीय बच्चा भीख मांगते-मांगते समाजसेवी रघुवीर कड़वासरा के प्रतिष्ठान पर जा पहुंचा। रघुबीर कड़वासरा अपने प्रतिष्ठान पर बैठे हुए थे। इसी दौरान एक बच्चा भीख मांगने के लिए पहुंचा। बच्चे ने जैसे ही अपना हाथ भीख मांगने के लिए आगे बढ़ाया उन्होंने मन में सोचा कि इस बच्चे के हाथ में भीख के लिए कटोरा नहीं कलम होनी चाहिए। फिर क्या था समाजसेवी ने बच्चे का स्कूल में नाम लिखवाने की सोचा। इसके बाद बच्चे को बैठाकर चाय पिलाई। बच्चे को खाना खिलाया और उसे पढ़ाई करने के लिए प्रेरित करते हुए समझाया। कड़वासरा बताते हैं कि बच्चे की पढ़ाई करने की बात करने के लिए गाड़ी में बैठाकर उसके माता-पिता के पास ले गये। बच्चे के घर पहुंचने पर पता चला कि उसकी(राम) की एक बहन भी है और वह भी स्कूल नहीं जाती। उन्होंने बच्चे के पिता व उसकी मां को समझाया कि बच्चों से भीख मांगवाना बंद करो क्योंकि यह एक कानूनी अपराध है।
UP TO DATE
इन बच्चों की अभी पढ़ाई की उम्र है। इनका जीवन इस गैर कानूनी काम से नहीं व्यतीत होगा इनको पढ़ाना जरूरी है। इसके बाद कड़वासरा ने कहा कि बच्चे का जितना भी पढ़ाई पर खर्च होगा उसे मैं स्वयं वहन करूँगा इनकी पढ़ाई के लिए आपको चिंता करने की जरूरत नहीं है। इसके बाद दोनों बच्चों को बाजार में लेकर गए और स्कूल की वर्दी और कॉपी-किताबें दिलाई। कड़वासरा इन बच्चों को स्कूल में लेकर पहुंचे और शिक्षक हरपाल सिंह को बच्चों का दाखिला करने व पढ़ाई करवाने की बात कही। शिक्षक हरपाल ने कहा कि पढ़ने का अधिकार सबको है। छोटे-छोटे बच्चों को भीख जैसे कुकर्म में न डालकर पढ़ाई करने के लिए स्कूल भेजना चाहिए ताकि ये बच्चे भी समाज के साथ मिलकर अपने सपनों को उड़ान दे सकें।
लेकिन अशिक्षा के कारण कुछ बच्चों के माता-पिता अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेज पाते जिससे बालकों को आने वाले जीवन में बेहद कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है। इसके बाद लड़के के पिता-माता ने बच्चों को प्रतिदिन स्कूल भेजने की बात कही।
पाठकों से अपील
ये तो थी नाथुसरी कलां गांव के रघुवीर सिंह द्वारा स्कूल में पढ़ने के लिए लगाने की एक सच्ची पहल। ऐसे ही हजारों बच्चे आज सड़कों, चौक-चौराहों व गांवों में कोई भेष बदलकर तो कोई हाथ में कटोरा लेकर इधर-उधर भीख मांगते नजर आ रहे हैं। हमारी पाठकों से भी एक अपील है कि आपको भी कहीं आपके आसपास छोटे बच्चे भीख जैसे काम में लिप्त मिले तो थोड़ा ठहरकर सोचें और इनकी पढ़ाई के बारे में उनके अभिभावकों को भी समझाएं और जहां तक हो सके तो शिक्षा में सहयोग भी करें।
सरकार द्वारा बच्चों की पढ़ाई के लिए चलाई जा रही स्कीमें
National Education
Top Education Schemes and Programs 2025 सरकार बच्चों की शिक्षा के लिए कई योजनाएं चलाती है, जिनमें शिक्षा का अधिकार (आरटीई) कानून शामिल है जो 6 से 14 साल के बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा सुनिश्चित करता है, और निजी स्कूलों में कमजोर वर्ग के बच्चों की शिक्षा के लिए 25% आरक्षण तक की भी व्यवस्था करता है।
अन्य योजनाओं की बात करें तो कोविड-19 के दौरान अनाथ हुए बच्चों के लिए पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन योजना, मेधावी छात्रों को शिक्षा ऋण देने वाली पीएम-विद्यालक्ष्मी योजना, और लड़कियों को मुफ्त साइकिल देने जैसी योजनाएं शामिल हैं। जिनका लाभ उठाकर गरीब परिवारों के बच्चे भी पढ़ाई कर अपने सपनों को उड़ान दे सकते हैैं।
केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही शिक्षा योजना:
निपुण भारत मिशन (NIPUN Bharat), समग्र शिक्षा योजना (Samagra Shiksha), प्रेरणा कार्यक्रम (PRERNA), राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020, स्वयम प्लस (SWAYAM Plus), उल्लास या नव भारत साक्षरता कार्यक्रम (ULLAS/NILP), विद्या प्रवेश कार्यक्रम (Vidya Pravesh), पीएम-श्री विद्यालय योजना (PM SHRI Schools), पीएम-श्री विद्यालय योजना (PM SHRI Schools), दीक्षा पोर्टल (DIKSHA), विद्यांजली योजना (Vidyanjali), निष्ठा कार्यक्रम (NISHTHA), पीएम-विद्या लक्ष्मी योजना (PM-Vidyalaxmi Scheme)

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