स्वदेशी अपनाएँ, देश को मजबूत बनाएँ! उठी भारत को आत्मनिर्भर बनाने की आवाज



पंचकूला। पंचकूला में आयोजित स्वदेशी महोत्सव 2025 न केवल स्वदेशी उत्पादों और भारतीय संस्कृति के प्रचार का मंच बना, बल्कि यह आयोजन आत्मनिर्भर भारत, सामाजिक चेतना, कानूनी साक्षरता और पर्यावरण संरक्षण का एक प्रभावी माध्यम बनकर उभरा। महोत्सव के पहले ही दिन 40 हजार से अधिक लोगों की उपस्थिति ने स्वदेशी आंदोलन के प्रति जनता के बढ़ते विश्वास और रुचि को स्पष्ट रूप से दर्शाया। महोत्सव में राज्यसभा सांसद कार्तिकेय शर्मा और उत्तर क्षेत्र प्रचारक प्रमुख बनवीर ने सहभागिता की। दोनों ने स्वदेशी से जुड़े विभिन्न स्टॉलों का निरीक्षण किया और कुटीर उद्योग, हस्तशिल्प, खादी, आयुर्वेदिक उत्पादों एवं देसी खाद्य सामग्री को आत्मनिर्भर भारत की रीढ़ बताया। up to date




स्वदेशी केवल मेला नहीं, राष्ट्र निर्माण का आंदोलन

राज्यसभा सांसद कार्तिकेय शर्मा ने कहा कि स्वदेशी महोत्सव केवल एक व्यापारिक मेला नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का एक सशक्त आंदोलन है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वोकल फॉर लोकल के आह्वान को यह आयोजन धरातल पर उतारने का कार्य कर रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हरियाणा की सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक ज्ञान और देसी उत्पादों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना आज की बड़ी आवश्यकता है। up to date

कानूनी व पर्यावरण जागरूकता को मिली नई दिशा

महोत्सव के दौरान हरियाणा राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण (HALSA) और जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण (DLSA), पंचकूला द्वारा लगाए गए विशेष स्टॉल का उद्घाटन जगदीप सिंह लोहान, सदस्य सचिव द्वारा किया गया। इस स्टॉल के माध्यम से आम नागरिकों को मुफ्त कानूनी सहायता, पर्यावरण संरक्षण और विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी जा रही है। उद्घाटन अवसर पर पवन कुमार शर्मा, अध्यक्ष, जिला बार एसोसिएशन, पंचकूला ने अतिथियों और अधिकारियों का स्वागत किया। इस दौरान पवन कुमार कौशिक, मुख्य (DLSA) अपनी पूरी टीम के साथ उपस्थित रहे। HALSA के पैनल अधिवक्ता नायब सिंह और रोनित सिंह ने आम लोगों से संवाद कर उन्हें कानूनी सेवाओं और अधिकारों के बारे में जागरूक किया। up to date




स्वदेशी से ही सच्ची आत्मनिर्भरता

स्वदेशी मेले में पहुंचे बनवीर (उत्तर क्षेत्र प्रचारक प्रमुख) ने कहा कि स्वदेशी भारत की सांस्कृतिक, आर्थिक और वैचारिक स्वतंत्रता का आधार है। जब तक समाज स्वदेशी को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा नहीं बनाएगा, तब तक आत्मनिर्भरता अधूरी रहेगी। ऐसे महोत्सव जनमानस को स्वदेशी से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं। राजेश गोयल (स्वदेशी जागरण मंच) ने कहा कि स्वदेशी को अपनाने से देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होती है और स्थानीय कारीगरों व उद्यमियों को सम्मान के साथ रोजगार मिलता है। up to date

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 सैकड़ों स्टॉल, जबरदस्त जनसमर्थन

रजनीश गर्ग (मेला प्रमुख) ने बताया कि महोत्सव में सैकड़ों स्वदेशी स्टॉल लगाए गए हैं, जिनमें खादी, ग्रामोद्योग, आयुर्वेदिक और पारंपरिक उत्पादों को लोगों का जबरदस्त समर्थन मिल रहा है। उन्होंने कहा कि स्वदेशी महोत्सव जनता को देसी उत्पादों से जोड़ने के साथ-साथ सामाजिक और राष्ट्रीय चेतना को भी मजबूत कर रहा है।


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