अब मनरेगा नहीं, होगी पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार गारंटी बिल, जानें कितने दिन मिलेगा काम...

कई कानूनों को मिली मंजूरी, 125 दिन मिलेगा रोजगार, अहम माना जा रहा यह फैसला


रोजगार के दिनों की संख्या करे 100 से बढ़ाकर 125 करने का फैसला up to date 


केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा मनरेगा (महात्मा गांधी नेशनल रोजगार गारंटी योजना)  Mahatama Gandhi Rastriya Rijgar Gurantee Yojana के तहत दिए जाने वाले रोजगार के दिनों की संख्या करे 100 से बढ़ाकर 125 करने का एक अहम फैसला लिया है। इससे ग्रामीण परिवारों की आय तो बढ़ेगी ही साथ ही में रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकेंगे। इसके अलावा, सिविल न्यूक्लियर एनर्जी और बीमा के क्षेत्र में भी बदलावों को मंजूरी मिली है। शनिवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सामाजिक सुरक्षा (सोसल सिक्योरिटी) को मजबूत करने के उद्देश्य से कई कानूनों को मंजूरी देने का काम किया है। इसमें रोजगार गारंटी योजना MGNREGA (मनरेगा) या NREGA (नरेगा)  के तहत श्रमिकों काम के दिनों की संख्या बढ़ाना, सिविल न्यूक्लियर एनर्जी के क्षेत्र में निजी कंपनियों को मौका देना बीमा में 100% तक विदेशी निवेश की अनुमति देकर बाजारों और वित्तीय क्षेत्र को मजबूत करना भी शामिल है। आईए अब जानते हैं मनरेगा पर सरकार ने क्या बड़े बदलाव किए हैं, और इसका आम लोगों पर क्या असर होगा... up to date

जल्द ही  'पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार गारंटी बिल' करने के लिए बिल पेश करने जा रही है।


up to date


अब 125 रोजगार की गारंटी

यह बिल मौजूदा मनरेगा की जगह लेगा और ग्रामीण परिवारों को हर साल 125 दिनों के रोजगार की गारंटी देगा, जो अभी 100 दिन है। इस योजना के लिए सरकार 95 हजार 600 करोड़ रुपये से अधिक खर्च करने का फैसला ले रही है। मोदी सरकार के इस कदम से ग्रामीण लोगों को इससे काफी फायदा मिलेगा। up to date


जानें क्यों अहम है यह फैसला?

नरेंद्र मोदी सरकार की ओर से मनरेगा का नाम बदलना और रोजगार के दिनों की संख्या बढ़ाने का यह फैसला पश्चिम बंगाल जैसे कई राज्यों में होने वाले चुनावों को देखते हुए भी अहम माना जा रहा है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल मनरेगा को अपना फ्लैगशिप प्रोग्राम बताते रहे हैं और सरकार पर इसे पर्याप्त फंड न देने का आरोप लगाते रहे हैं। अब नए बिल से सरकार विपक्ष के इस आरोप का जवाब देने की कोशिश करेगी। यह योजना बीजेपी और पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी टीएमसी के बीच बड़ा राजनीतिक विवाद का मुद्दा बनी हुई है, क्योंकि केंद्र ने कथित वित्तीय अनियमितताओं का हवाला देते हुए 2022 से पश्चिम बंगाल को फंड देना रोक रखा था। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट द्वारा केंद्र सरकार को योजना फिर से शुरू करने का आदेश दिए जाने से भी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ, क्योंकि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्रीय दिशा-निर्देशोें वाले एक कागज को फाड़ दिया। up to date


अपने कई तरीकों से सुधार कर पेश करने जा रही है। up to date


क्यों परिवर्तित किया गया मनरेगा का नाम?

जानकारों की मानें तो मनरेगा का नाम बदलने का फैसला इसलिए भी लिया जा रहा है कि बीजेपी सरकार ने वर्ष 2015 में मनरेगा को कांगे्रस सरकार की सबसे बड़ी विफलता का जीता जागता उदाहरण भी कहा था। अब सरकार इसे अपने कई तरीकों से सुधार कर पेश करने जा रही है। नए बिल के तहत होने वाले सभी प्रोजेक्ट 'विकसित भारत नेशनल इंफ्रा स्टैक' का हिस्सा होंगे, जो पीएम गतिशक्ति मास्टर प्लान का उपयोग करके बनाया जाएगा। इसमें जल सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। राज्यों को खेती के मौसम में मजदूरों की कमी न हो, इसके लिए 60 दिन पहले से योजना बनानी होगी। अगर कोई राज्य किसी परिवार को समय पर काम नहीं दे पाता है, तो उसे बेरोजगारी भत्ता मिलेगा। up to date


इस कदम का सीधा असर ग्रामीण लोगों पर पड़ेगा up to date


ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा असर

आर्थिक सलाहकारों की मानें तो केंद्र सरकार के इस कदम का सीधा असर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों पर पड़ेगा। 25 दिन का अतिरिक्त रोजगार मिलने से उनकी आय में इजाफा तो होगा ही साथ ही रोजगार सृजन के नए तरीके भी विकसित होंगे। लोगों की कमाई अधिक होने से इसका सीधा असर बाजार पर भी पड़ने वाला है। up to date

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ