गरीबों को मिलेगा स्थायी रोजगार या बदलेगा सिर्फ नाम? विकसित भारत योजना पर नजर
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| सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में मनरेगा जैसी अस्थायी रोजगार योजनाओं की जगह स्थायी, कौशल-आधारित और सम्मानजनक रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएं up to date |
नई दिल्ली। PM Viksit Bharat Rozgar Yojana: केंद्र सरकार द्वारा ग्रामीण और शहरी गरीब परिवारों के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता को केंद्र में रखते हुए नए सिरे से एक विकसित भारत की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में मनरेगा जैसी अस्थायी रोजगार योजनाओं की जगह स्थायी, कौशल-आधारित और सम्मानजनक रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएं। इस दिशा में प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में गरीबों के कल्याण को प्राथमिकता देते हुए नई रणनीति तैयार की जा रही है। इस नई सोच के तहत ग्रामीण परिवारों को वर्ष में कम से कम 125 दिनों के रोजगार की गारंटी देने पर गंभीरता से काम किया जा रहा है, ताकि लोगों को केवल सरकारी सहायता पर निर्भर न रहना पड़े। सरकार का मानना है कि बीते वर्षों में चलाई गई योजनाओं से देश में गरीबी कम करने में सफलता मिली है। पक्के मकान, शौचालय, बिजली, गैस और सीधे बैंक खातों में सहायता पहुंचने से गरीबों की जीवन स्थितियों में सुधार हुआ है। अब सरकार का फोकस इस बात पर है कि गरीबी उन्मूलन से आगे बढ़कर गरीबी मुक्त भारत का निर्माण किया जाए। इसके लिए रोजगार को गांवों के विकास, स्थानीय उद्योग, कृषि आधारित गतिविधियों और कौशल प्रशिक्षण से जोड़ा जाएगा, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में ही आजीविका के स्थायी साधन विकसित हो सकें। up to date
ग्रामीण परिवारों को 125 दिन रोजगार की गारंटी
सरकार की नई पहल के तहत ग्रामीण परिवारों को वर्ष में कम से कम 125 दिनों के रोजगार की गारंटी देने की योजना पर काम किया जा रहा है। इसका उद्देश्य केवल मजदूरी उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, रोजगार को स्थानीय जरूरतों और विकास कार्यों से जोड़ा जाएगा, जिससे गांवों में ही आजीविका के स्थायी साधन विकसित हो सकें। up to date
बीते 20 वर्षों में बदली गरीबों की तस्वीर
सरकार का दावा है कि पिछले 20 वर्षों में देश में गरीबों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति में ऐतिहासिक सुधार हुआ है।
- करोड़ों लोग गरीबी रेखा से बाहर आए,
- पक्के मकान, शौचालय, बिजली और गैस कनेक्शन जैसी बुनियादी सुविधाएं बढ़ीं
- सीधी लाभ अंतरण (ऊइळ) से भ्रष्टाचार पर अंकुश लगा
- इन प्रयासों के चलते अब सरकार का फोकस गरीबी उन्मूलन से आगे बढ़कर गरीबी मुक्त भारत के निर्माण पर है। up to date
मनरेगा से आगे का मॉडल
सरकार का मानना है कि मनरेगा ने ग्रामीण मजदूरों को कठिन समय में सहारा दिया, लेकिन अब समय आ गया है कि इससे आगे बढ़कर उत्पादन, कौशल और उद्यमिता आधारित रोजगार मॉडल अपनाया जाए।
नई व्यवस्था में—
- स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा
- कृषि से जुड़े गैर-कृषि रोजगार
- लघु और कुटीर उद्योगों को सहायता
- महिला स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक मजबूती
- जैसे बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
- गरीबों के लिए आत्मसम्मान और स्थायित्व
- सरकार का जोर इस बात पर है कि गरीब परिवारों को केवल सहायता पर निर्भर न रखा जाए, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनाया जाए।
नई सोच के अनुसार रोजगार केवल आमदनी का जरिया नहीं, बल्कि—
- सामाजिक सम्मान
- आर्थिक सुरक्षा
- भविष्य की स्थिरता
- का माध्यम होना चाहिए।
- गांवों में विकास, शहरों पर बोझ कम
विकसित भारत अभियान के तहत गांवों में रोजगार के अवसर बढ़ाकर शहरों की ओर पलायन रोकने पर भी फोकस किया जा रहा है। up to date
पलायन रोकने पर फोकस: गांवों में ही—
- सड़क
- जल संरक्षण
- डिजिटल सेवाएं
- स्थानीय उत्पादन इकाइयां
- विकसित कर ग्रामीण युवाओं को अपने क्षेत्र में ही रोजगार देने की योजना है।
पारदर्शिता और टेक्नोलॉजी का उपयोग
नई रोजगार व्यवस्था में डिजिटल प्लेटफॉर्म, आधार आधारित भुगतान और आॅनलाइन मॉनिटरिंग को अनिवार्य किया जाएगा। इससे—
- मजदूरी समय पर मिलेगी
- फजीर्वाड़ा रुकेगा
- लाभार्थियों का सीधा जुड़ाव सुनिश्चित होगा
क्नोलॉजी के माध्यम से योजनाओं की प्रभावशीलता
- महिला और युवा केंद्रित योजनाएं
- नई नीति में महिलाओं और युवाओं को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी।
- महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों के जरिए रोजगार
- युवाओं को कौशल प्रशिक्षण और स्टार्टअप से जोड़ना
- डिजिटल और ग्रीन जॉब्स पर फोकस
- इससे सामाजिक समानता और आर्थिक भागीदारी दोनों को मजबूती मिलेगी।
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हाइलाइट्स (Top News Highlights)
- मनरेगा की जगह ‘विकसित भारत रोजगार मॉडल’ लाने की दिशा में केंद्र सरकार की नई रणनीति।
- ग्रामीण परिवारों को साल में 125 दिनों के रोजगार की प्रभावी गारंटी देने की योजना।
- सरकार का फोकस अस्थायी मजदूरी से हटकर स्थायी, कौशल-आधारित रोजगार पर।
- बीते 20 वर्षों में करोड़ों लोग गरीबी रेखा से बाहर, अब लक्ष्य गरीबी मुक्त भारत।
- रोजगार योजनाओं को स्थानीय विकास, कृषि और कुटीर उद्योगों से जोड़ा जाएगा।
- गांवों में रोजगार बढ़ाकर शहरों की ओर पलायन रोकने पर विशेष जोर।
- महिलाओं और युवाओं के लिए स्वयं सहायता समूह, स्किल ट्रेनिंग और स्टार्टअप समर्थन।
- डिजिटल प्लेटफॉर्म, आधार आधारित भुगतान और आॅनलाइन मॉनिटरिंग से पूरी पारदर्शिता।
- नई नीति का उद्देश्य गरीबों को सहायता पर निर्भर रखने के बजाय आत्मनिर्भर बनाना।
- ‘विकसित भारत’ विजन के तहत रोजगार को सम्मान, सुरक्षा और स्थायित्व से जोड़ा जाएगा। up to date



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