Motivational Story : इंजेक्शन ने छीनी उंगलियां, पुलिस ने बचाई जिंदगी—नशे की दलदल से बाहर आया कुलदीप

इंजेक्शन ने छीनी उंगलियां, लेकिन फतेहाबाद पुलिस ने लौटा दी जिदगी


फतेहाबाद। नशा इंसान से सिर्फ उसका शरीर नहीं छीनता, बल्कि उसका सम्मान, परिवार और भविष्य भी खत्म कर देता है। फतेहाबाद जिले के गांव तामसपुरा निवासी कुलदीप की कहानी इसी कड़वे सच की गवाही देती है। मेडिकल नशे से शुरू हुआ उसका सफर इंजेक्शन तक पहुंचा और वहां से सीधे मौत के मुहाने पर ले गया। गैंग्रीन ने उसके हाथ की उंगलियां छीन लीं, लेकिन समय रहते फतेहाबाद पुलिस की नशा मुक्ति टीम ने हस्तक्षेप कर उसकी पूरी जिंदगी बचा ली। कुलदीप एक सामान्य किसान परिवार से है। गलत संगत में पड़कर उसने मौज-मस्ती के नाम पर पहले मेडिकल गोलियां लेना शुरू किया। शुरूआत में यह उसे सुकून लगा, लेकिन जल्द ही यह आदत बन गई। दो गोलियों से शुरू होकर उसकी खुराक रोजाना 15-20 गोलियों तक पहुंच गई। जब गोलियों से नशा पूरा नहीं हुआ, तो उसने इंजेक्शन का सहारा ले लिया। यही उसकी सबसे बड़ी भूल साबित हुई। लगातार इंजेक्शन लगाने से उसके हाथ में गंभीर संक्रमण हो गया। देखते ही देखते गैंग्रीन फैल गया। उंगलियां सूखने लगीं, घाव असहनीय हो गए और काम-धंधा पूरी तरह छूट गया। परिवार टूटने लगा, समाज ने मुंह मोड़ लिया और कुलदीप चारपाई तक सिमट गया। वह अकेला, बेबस और जिंदगी से हार चुका था।

आपरेशन जीवन ज्योति बना जीवन रक्षक

इसी बीच गांव तामसपुरा में आॅपरेशन जीवन ज्योति के तहत फतेहाबाद पुलिस की नशा मुक्ति टीम ने कैंप लगाया। पुलिस अधीक्षक सिद्धांत जैन, आईपीएस के निर्देशन में चल रहे इस अभियान का उद्देश्य नशा पीड़ितों को इलाज के साथ नई सोच देना है। नशा मुक्ति टीम इंचार्ज सुंदर लाल को जब कुलदीप की हालत की जानकारी मिली तो वे टीम के साथ तुरंत उसके घर पहुंचे।

घर के भीतर का दृश्य बेहद मार्मिक था। कुलदीप एक कोने में पड़ा था—टूटा हुआ, हताश और दर्द से जूझता हुआ। लेकिन सुंदर लाल ने वहां एक मरीज नहीं, बल्कि एक इंसान देखा, जिसे बचाया जा सकता था। उन्होंने परिवार और पत्नी बीना को भरोसा दिलाया—

आप चिंता न करें, इसे हम ठीक करके ही छोड़ेंगे।



इलाज, भरोसा और हौसले ने बदली तस्वीर

इसके बाद कुलदीप का नियमित इलाज शुरू हुआ। दवाइयों के साथ काउंसलिंग की गई। हर दिन उसे यह एहसास दिलाया गया कि उसकी जिंदगी अभी खत्म नहीं हुई है। लगातार देखभाल, मानसिक सहयोग और परिवार के साथ के चलते उसने नशे को पूरी तरह छोड़ दिया।

आज कुलदीप नशा-मुक्त है। भले ही गैंग्रीन के कारण उसका एक अंगूठा और दो उंगलियां प्रभावित हुई हों, लेकिन उसकी जिंदगी बच गई। सबसे बड़ी बात यह है कि उसे उसका परिवार और समाज दोबारा मिल गया। उसकी 10 वर्षीय बेटी किरणदीप कौर अब गर्व से अपने पिता के पास बैठती है।

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