LIVE UPDATE: पंडित जसराज जी की जयंती पर गांव पीली मांदौरी सीएम के स्वागत के लिए तैयार, संगीत से गुंजेगा गांव

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फतेहाबाद। भारतीय शास्त्रीय संगीत की अमूल्य धरोहर, मेवाती घराने के महान साधक और पद्म विभूषण से सम्मानित पंडित जसराज की जयंती के अवसर पर 2 फरवरी को हरियाणा के फतेहाबाद जिले के ऐतिहासिक गांव पीलीमंदोरी में एक भव्य राज्य स्तरीय समारोह का आयोजन किया जा रहा है। प्रातः 11 बजे आरंभ होने वाले इस गरिमामय कार्यक्रम में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। यह आयोजन न केवल फतेहाबाद बल्कि पूरे हरियाणा के लिए गौरव का विषय है, क्योंकि पंडित जसराज का जन्म इसी पावन भूमि पर हुआ था।up to date

हरियाणा सरकार द्वारा संत-महापुरुष सम्मान एवं विचार प्रसार योजना के अंतर्गत आयोजित इस समारोह में देश-प्रदेश के दिग्गज शास्त्रीय गायक, भजन गायक और लोक कलाकार अपनी संगीतमय प्रस्तुतियों के माध्यम से पंडित जसराज को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। कार्यक्रम में मुंबई से पंडित जसराज के परिजन भी विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे। इसके अतिरिक्त सुप्रसिद्ध गायक सोनू निगम, प्रख्यात भजन गायक अनूप जलोटा सहित कई नामचीन कलाकारों के भाग लेने की संभावना है। up to date


पंडित जसराज : प्रारंभिक जीवन और संगीत की शुरुआत

पंडित जसराज का जन्म 28 जनवरी 1930 को हरियाणा के फतेहाबाद जिले के गांव पीलीमंदोरी में हुआ था। उनका पूरा नाम जसराज मोटवानी था। संगीत उन्हें विरासत में मिला। उनके पिता पंडित मोतीराम स्वयं मेवाती घराने के प्रतिष्ठित गायक थे और शास्त्रीय संगीत के गहरे जानकार थे। दुर्भाग्यवश, जब पंडित जसराज मात्र तीन वर्ष के थे, तब उनके पिता का निधन हो गया। इसके बाद परिवार पर आर्थिक और भावनात्मक संकट आ गया।

कम उम्र में ही पंडित जसराज ने संगीत को अपना जीवन बना लिया। उनके बड़े भाई पंडित मणिराम ने उन्हें संगीत की बारीकियां सिखाईं। प्रारंभ में उन्होंने तबला और हारमोनियम सीखा, लेकिन शीघ्र ही उनकी रुचि और प्रतिभा गायन की ओर केंद्रित हो गई। कठिन परिस्थितियों, संघर्ष और सीमित संसाधनों के बावजूद उनकी साधना में कोई कमी नहीं आई।


मेवाती घराने के महान स्तंभ

पंडित जसराज मेवाती घराने के सबसे प्रमुख और प्रभावशाली स्तंभ माने जाते हैं। इस घराने की विशेषता है—गायन में माधुर्य, भाव, स्पष्ट उच्चारण और भक्ति रस की प्रधानता। पंडित जसराज ने इस परंपरा को न केवल जीवित रखा, बल्कि उसे नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। up to date

उनकी गायकी में खयाल, ध्रुपद, भजन, अभंग और शबद का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। उन्होंने शास्त्रीय संगीत को केवल मंच तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे आम जनमानस से जोड़ा। उनकी आवाज़ में एक दिव्यता और आत्मिक गहराई थी, जो श्रोता को भीतर तक छू जाती थी। up to date


संगीत में नवाचार और वैश्विक पहचान

पंडित जसराज केवल परंपरा के संवाहक ही नहीं थे, बल्कि नवाचार के भी प्रतीक थे। उन्होंने जुगलबंदी और थीम आधारित राग प्रस्तुति को नई पहचान दी। उन्होंने महिला गायकों के साथ जुगलबंदी को लोकप्रिय बनाया, जो उस समय एक नया प्रयोग माना जाता था।

उन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी प्रतिष्ठा दिलाई। अमेरिका, यूरोप, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और एशिया के कई देशों में उन्होंने अपने कार्यक्रम प्रस्तुत किए। उनके संगीत ने भारतीय संस्कृति और अध्यात्म को विश्व पटल पर सम्मान दिलाया। up to date


भक्ति और अध्यात्म से जुड़ा संगीत

पंडित जसराज की संगीत साधना का मूल आधार भक्ति था। वे संगीत को ईश्वर से जुड़ने का माध्यम मानते थे। उनके द्वारा गाए गए मीरा के भजन, तुलसीदास की रचनाएं, आदि शंकराचार्य के स्तोत्र और शिव-भक्ति से जुड़े भजन आज भी श्रोताओं के हृदय में गूंजते हैं।

उनका मानना था कि संगीत केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धि का साधन है। यही कारण है कि उनकी प्रस्तुतियों में एक आध्यात्मिक ऊर्जा महसूस होती थी। up to date


सम्मान और उपलब्धियां

पंडित जसराज को उनके अतुलनीय योगदान के लिए देश-विदेश में अनेक सम्मान प्राप्त हुए। भारत सरकार ने उन्हें

  • पद्म श्री
  • पद्म भूषण
  • पद्म विभूषण

जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा। इसके अलावा उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, तानसेन सम्मान और कई अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार भी मिले। ये सभी सम्मान उनकी साधना, समर्पण और संगीत के प्रति निष्ठा का प्रमाण हैं।


गुरु और मार्गदर्शक के रूप में पंडित जसराज

पंडित जसराज एक महान गुरु भी थे। उन्होंने सैकड़ों शिष्यों को शास्त्रीय संगीत की शिक्षा दी। उनकी शिष्या और पुत्री दुर्गा जसराज, शिष्या कविता कृष्णमूर्ति, और कई अन्य कलाकार आज संगीत जगत में प्रतिष्ठित स्थान रखते हैं।

वे अपने शिष्यों को केवल सुर-ताल ही नहीं, बल्कि अनुशासन, विनम्रता और साधना का महत्व भी सिखाते थे। उनका मानना था कि सच्चा कलाकार वही है, जो जीवन भर सीखता रहे।


पीलीमंदोरी में राज्य स्तरीय समारोह की भव्य तैयारियां

पंडित जसराज की जयंती पर आयोजित राज्य स्तरीय समारोह के लिए गांव पीलीमंदोरी में व्यापक तैयारियां की गई हैं। कार्यक्रम स्थल को अत्यंत भव्य और आकर्षक रूप से सजाया गया है। दर्शकों की सुविधा के लिए पूरे परिसर को छह सेक्टरों में विभाजित किया गया है।

कलाकारों की प्रस्तुतियों के लिए विशेष रूप से सुसज्जित मंच तैयार किया गया है। इसके साथ ही कार्यक्रम का सजीव प्रसारण सुनिश्चित करने के लिए विशाल एलईडी स्क्रीन भी लगाई गई हैं, ताकि अंतिम पंक्ति में बैठा दर्शक भी कार्यक्रम का पूरा आनंद ले सके।up to date


हरियाणा के लिए गौरव का अवसर

यह समारोह केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि हरियाणा की सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देने का अवसर है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की उपस्थिति इस आयोजन को और भी गरिमामय बनाएगी। यह आयोजन आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश देगा कि हरियाणा की भूमि ने देश को पंडित जसराज जैसे महान कलाकार दिए हैं।up to date


पंडित जसराज की अमर विरासत

पंडित जसराज भले ही आज हमारे बीच शारीरिक रूप से उपस्थित न हों, लेकिन उनकी आवाज़, उनकी साधना और उनका संगीत सदैव जीवित रहेगा। उन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत को केवल एक कला नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक अनुभव बनाया।

पीलीमंदोरी में आयोजित यह राज्य स्तरीय समारोह उनकी उसी अमर विरासत को नमन है। यह आयोजन संगीत प्रेमियों, कलाकारों और आम जनता के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा और पंडित जसराज की स्मृति को सदैव जीवंत रखेगा।up to date

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