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| यह साधारण-सा दिखने वाला बिस्किट भारतीय घरों का हिस्सा रहा है |
Parle-G फैक्ट्री बंद: एक युग का अंत, लेकिन यादें हमेशा जिंदा रहेंगी
भारत में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा, जिसने बचपन में Parle-G बिस्किट न खाया हो। चाय में डुबोकर खाया जाने वाला यह साधारण-सा दिखने वाला बिस्किट दशकों से भारतीय घरों का हिस्सा रहा है। Parle-G सिर्फ एक बिस्किट नहीं, बल्कि पीढ़ियों की भावनाओं, संघर्ष और सादगी की कहानी है। ऐसे में जब यह खबर सामने आई कि मुंबई के विले पार्ले स्थित Parle-G की ऐतिहासिक फैक्ट्री बंद हो चुकी है, तो देशभर में लोगों की भावनाएं जुड़ गईं। up to date
यह वही फैक्ट्री थी, जहां से भारत के सबसे लोकप्रिय बिस्किट Parle-G ने अपनी पहचान बनाई थी। अब इस ऐतिहासिक स्थल को एक नए कमर्शियल प्रोजेक्ट में तब्दील किया जा रहा है। यह खबर भले ही औद्योगिक विकास से जुड़ी हो, लेकिन भावनात्मक रूप से यह एक पूरे युग के अंत जैसा है।
1929 से शुरू हुई Parle Products की कहानी
Parle Products की स्थापना वर्ष 1929 में मुंबई के विले पार्ले इलाके में की गई थी। उस समय भारत आज़ादी से पहले का दौर देख रहा था और स्वदेशी उद्योगों को बढ़ावा देने की जरूरत महसूस की जा रही थी। Parle की शुरुआत एक छोटे से यूनिट के रूप में हुई, जहां मुख्य रूप से टॉफी और कैंडी बनाई जाती थीं। up to date
साल 1939 में कंपनी ने बिस्किट निर्माण की दिशा में कदम बढ़ाया। इसी फैक्ट्री में बाद में वह बिस्किट बना, जो आगे चलकर हर भारतीय घर का हिस्सा बन गया—Parle-G।
“Parle” नाम भी विले पार्ले क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। माना जाता है कि इसका नाम पारलेश्वर और विरलेश्वर मंदिरों या पुराने Padle और Irle गांवों से प्रेरित है। इस तरह Parle का नाम भी स्थानीय विरासत से जुड़ा हुआ है।
Parle-G: सस्ता, पौष्टिक और भरोसेमंद
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| सादगी और किफायती कीमत |
Parle-G की सबसे बड़ी ताकत इसकी सादगी और किफायती कीमत रही है। लंबे समय तक यह बिस्किट “G for Glucose” के नाम से जाना गया। इसे बच्चों, मजदूरों, छात्रों और बुजुर्गों तक के लिए ऊर्जा का सस्ता स्रोत माना गया। up to date
स्कूल के टिफिन से लेकर रेल यात्रा तक, Parle-G हर जगह दिखाई देता रहा। यही वजह है कि यह सिर्फ एक ब्रांड नहीं, बल्कि एक भावनात्मक अनुभव बन गया।
पैकेट पर बनी बच्ची का सच
Parle-G के पैकेट पर बनी मासूम बच्ची दशकों से लोगों की जिज्ञासा का विषय रही है। समय-समय पर इसे किसी न किसी प्रसिद्ध महिला या व्यक्ति से जोड़ा जाता रहा। कई लोगों ने इसे सुधा मूर्ति, नीरू देशपांडे या किसी वास्तविक बच्ची की तस्वीर बताया। up to date
लेकिन Parle Products के अधिकारियों ने साफ किया है कि यह बच्ची किसी असली व्यक्ति की तस्वीर नहीं है। यह चित्र 1960 के दशक में कलाकार मगनलाल दहिया द्वारा डिजाइन किया गया था, जो उस समय Everest Creative से जुड़े हुए थे।
इस चेहरे का उद्देश्य था—मासूमियत, भरोसा और पारिवारिक भावना को दर्शाना। शायद यही कारण है कि यह चेहरा आज भी लोगों के दिलों में बसा हुआ है। up to date
2016 में बंद हुआ उत्पादन
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| विले पार्ले स्थित इस ऐतिहासिक फैक्ट्री |
बहुत कम लोग जानते हैं कि विले पार्ले स्थित इस ऐतिहासिक फैक्ट्री में 2016 के मध्य में ही बिस्किट निर्माण बंद कर दिया गया था। कंपनी ने धीरे-धीरे अपना उत्पादन महाराष्ट्र और देश के अन्य आधुनिक प्लांट्स में शिफ्ट कर दिया।
इस फैसले के पीछे कई कारण थे—
- जमीन की अत्यधिक कीमत
- पुराने इंफ्रास्ट्रक्चर की सीमाएं
- आधुनिक उत्पादन की जरूरत
- लॉजिस्टिक और पर्यावरणीय नियम
हालांकि फैक्ट्री में उत्पादन बंद हुआ, लेकिन Parle-G का निर्माण पूरी तरह बंद नहीं हुआ। आज भी Parle-G देश के अलग-अलग प्लांट्स में बड़े पैमाने पर बनाया जा रहा है।
2026 में पुनर्विकास को मिली मंजूरी
7 जनवरी 2026 को महाराष्ट्र राज्य पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन प्राधिकरण (SEIAA) ने इस जमीन के पुनर्विकास (Redevelopment) को मंजूरी दे दी। up to date
करीब 54,438.80 वर्ग मीटर (13.54 एकड़) में फैली इस जमीन पर अब एक बड़ा कमर्शियल कॉम्प्लेक्स विकसित किया जाएगा। इसके लिए फैक्ट्री परिसर में मौजूद 21 पुरानी इमारतों को गिराने की अनुमति दी गई है।
यह फैसला शहरी विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, लेकिन भावनात्मक रूप से यह उन लाखों लोगों के लिए दुखद है, जिनकी यादें इस जगह से जुड़ी हुई हैं। up to date
Parle सिर्फ Parle-G तक सीमित नहीं
Parle Products ने समय के साथ अपने उत्पादों का दायरा बढ़ाया। Parle-G के अलावा कंपनी ने कई लोकप्रिय ब्रांड बाजार में उतारे, जैसे—
- Hide & Seek
Krackjack
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Monaco
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Milk Bikis
इसके अलावा टॉफी और कन्फेक्शनरी सेगमेंट में—
- Kismi
- Melody
- Eclairs
- Mazelo
कंपनी ने रस्क, केक और ब्रेकफास्ट सीरियल्स में भी कदम रखा। बदलते बाजार और कड़ी प्रतिस्पर्धा के बावजूद Parle आज भी भारतीय FMCG सेक्टर का बड़ा नाम है। up to date
एक फैक्ट्री बंद, लेकिन विरासत जिंदा
विले पार्ले की फैक्ट्री का बंद होना तकनीकी रूप से एक औद्योगिक फैसला है, लेकिन भावनात्मक रूप से यह एक युग का अंत है। यह वही जगह थी, जहां से Parle-G ने आम भारतीय की थाली तक का सफर तय किया।
आज भले ही उस जमीन पर ऊंची इमारतें खड़ी होंगी, लेकिन Parle-G की खुशबू, स्वाद और उससे जुड़ी यादें कभी खत्म नहीं होंगी। up to date
हमेशा दिलों में रहेगा...Parle-G
Parle-G का इतिहास हमें यह सिखाता है कि सादगी, गुणवत्ता और भरोसा किसी भी ब्रांड को अमर बना सकते हैं। फैक्ट्री बंद हो सकती है, इमारतें गिर सकती हैं, लेकिन भावनाएं और यादें कभी नहीं मिटतीं।
Parle-G सिर्फ एक बिस्किट नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों के बचपन, संघर्ष और रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा रहा है। आने वाले समय में बाजार चाहे जितना बदल जाए, Parle-G हमेशा भारतीय दिलों में अपनी जगह बनाए रखेगा। up to date



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