18 वर्ष की उम्र में अग्निवीर बने खेड़ी के साहिल ज्याणी, पहले ही प्रयास में हासिल की सफलता

बचपन में लकड़ी की बंदूक से खेलकर देखा सपना, आज भारतीय सेना की वर्दी पहनकर किया साकार


साहिल के चयन से न केवल उनके परिवार में, बल्कि पूरे गांव और क्षेत्र में खुशी और गर्व का माहौल है।  up to date


नाथूसरी चौपटा। कहते हैं कि अगर सपने सच्चे मन से देखे जाएं और उन्हें पूरा करने के लिए ईमानदारी से मेहनत की जाए, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता। इस कहावत को सच कर दिखाया है पैंतालिसा क्षेत्र के गांव खेड़ी निवासी 18 वर्षीय साहिल ज्याणी ने, जिन्होंने बेहद कम उम्र में भारतीय सेना की अग्निवीर भर्ती प्रक्रिया को पहले ही प्रयास में सफलतापूर्वक पार कर लिया है। साहिल के चयन से न केवल उनके परिवार में, बल्कि पूरे गांव और क्षेत्र में खुशी और गर्व का माहौल है। भारतीय सेना में अग्निवीर बनना आसान नहीं होता। इसके लिए शारीरिक क्षमता, मानसिक मजबूती, अनुशासन और निरंतर अभ्यास की आवश्यकता होती है। साहिल ज्याणी ने यह साबित कर दिया कि यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो सीमित संसाधन भी रास्ते की बाधा नहीं बनते। साहिल का चयन 19 नवंबर को घोषित अग्निवीर भर्ती के अंतिम परिणाम में हुआ था। चयन सूची में नाम आने के बाद साहिल 12 दिसंबर को उत्तर प्रदेश के बरेली स्थित ट्रेनिंग सेंटर के लिए रवाना हो चुके हैं, जहां वे छह माह की कठिन सैन्य ट्रेनिंग प्राप्त करेंगे। up to date


सरकारी स्कूल से पढ़ाई, मेहनत से बनाई पहचान

साहिल ज्याणी ने इसी वर्ष रामपुरा ढिल्लो स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय से 12वीं कक्षा की पढ़ाई पूरी की है। उन्होंने अपनी अधिकांश शिक्षा सरकारी विद्यालय से ही प्राप्त की। सामान्य ग्रामीण परिवेश में पले-बढ़े साहिल शुरू से ही अनुशासित और लक्ष्य के प्रति गंभीर रहे हैं। पढ़ाई के साथ-साथ वे नियमित रूप से शारीरिक अभ्यास करते थे, ताकि सेना में भर्ती होने का सपना साकार कर सकें। साहिल के पिता दलीप सिंह पेशे से किसान हैं, जबकि माता राजबाला गृहिणी हैं। सीमित आय और संसाधनों के बावजूद परिवार ने साहिल के सपनों को कभी कमजोर नहीं पड़ने दिया। परिवार ने हर संभव सहयोग दिया और साहिल ने भी अपनी मेहनत से यह साबित किया कि प्रतिभा किसी सुविधा की मोहताज नहीं होती। up to date




बचपन से फौजी बनने का सपना, लकड़ी की बंदूक से शुरू हुआ सफर

साहिल की मां राजबाला ने भावुक होते हुए बताया कि उनका बेटा बचपन से ही सेना में जाने का सपना देखा करता था। उन्होंने बताया कि साहिल छोटे-छोटे लकड़ी के टुकड़ों से बंदूक बनाकर खेलता था और खुद को फौजी समझता था। खेल-खेल में शुरू हुआ यह सपना समय के साथ उसका लक्ष्य बन गया। मां ने बताया कि साहिल ने बहुत कम उम्र में ही अनुशासन को अपनी आदत बना लिया था। सुबह जल्दी उठना, दौड़ लगाना और व्यायाम करना उसकी दिनचर्या का हिस्सा था। गांव के कच्चे रास्तों और खेतों के बीच वह रोज दौड़ लगाता था। परिवार के लोगों को तब शायद अंदाजा नहीं था कि यह बच्चा एक दिन सच में भारतीय सेना का हिस्सा बनेगा। up to date


किसान पिता बोले— बेटे ने मेहनत से बढ़ाया मान

साहिल के पिता दलीप सिंह ने बेटे की सफलता पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि अग्निवीर की चयन प्रक्रिया बहुत कठिन होती है। उन्होंने बताया कि इसमें शारीरिक परीक्षा, लिखित परीक्षा और मेडिकल जांच जैसी कई कठिन प्रक्रियाएं होती हैं। दलीप सिंह ने कहा, हम किसान लोग हैं, साधन सीमित होते हैं, लेकिन साहिल ने कभी हार नहीं मानी। उसने अपने दम पर यह मुकाम हासिल किया है। यह सिर्फ हमारे परिवार के लिए नहीं, बल्कि उन सभी ग्रामीण युवाओं के लिए गर्व की बात है जो कठिन परिस्थितियों में भी बड़े सपने देखते हैं।


परिवार का पहला फौजी, गांव में खुशी का माहौल

साहिल ज्याणी अपने परिवार के पहले ऐसे सदस्य हैं, जिनका चयन भारतीय सेना में हुआ है। उनके चयन की खबर मिलते ही गांव खेड़ी में बधाइयों का सिलसिला शुरू हो गया। रिश्तेदारों, गांववासियों और मित्रों ने साहिल के घर पहुंचकर मिठाई खिलाई और उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि साहिल की सफलता से गांव के अन्य युवाओं को भी प्रेरणा मिलेगी। अब गांव के कई बच्चे सेना और अन्य सरकारी सेवाओं में जाने का सपना देखने लगे हैं। up to date


युवाओं के लिए प्रेरणा बना साहिल का संघर्ष

साहिल ज्याणी की सफलता केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह पूरे क्षेत्र के युवाओं के लिए एक प्रेरक उदाहरण बन गई है। उन्होंने यह संदेश दिया है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो, तो सफलता जरूर मिलती है। आज के समय में जब कई युवा संसाधनों की कमी या परिस्थितियों को अपनी असफलता का कारण मान लेते हैं, ऐसे में साहिल की कहानी उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। साहिल ने दिखा दिया कि गांव, खेत और साधारण परिवार से निकलकर भी देश की सेवा की जा सकती है।


देश सेवा का जज्बा, अनुशासन से मिली पहचान

साहिल का कहना है कि वह बचपन से ही देश के लिए कुछ करना चाहते थे। सेना की वर्दी पहनना उनके लिए गर्व की बात है। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, शिक्षकों और नियमित अभ्यास को दिया है। साहिल ने कहा कि आने वाली ट्रेनिंग कठिन होगी, लेकिन वह पूरी मेहनत और लगन से इसे पूरा करेंगे। नाथूसरी चौपटा क्षेत्र के लिए साहिल ज्याणी का चयन गर्व का विषय है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे युवा ही देश का भविष्य हैं। साहिल की सफलता से यह साबित होता है कि ग्रामीण प्रतिभाएं किसी से कम नहीं हैं, जरूरत है केवल सही दिशा और मेहनत की। up to date


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